
सीहोर। सावन के पावन महीने में सीहोर शहर एक बार फिर श्री शिवाय नमस्तुभ्यं और हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा है। आगामी 3, 10, 17 और 25 अगस्त को शहर में चार भव्य कांवड़ यात्राएं निकाली जाएंगी। लेकिन इस अपार शिवभक्ति के बीच सीवन नदी के तटों की बदहाली श्रद्धालुओं की आस्था पर भारी पड़ती दिख रही है।
देशभर से आने वाले लाखों कांवडिय़ों को उम्मीद थी कि इस वर्ष सीहोर के जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी सीवन नदी और उसके घाटों की कायाकल्प कर इसे संवारेंगे। परंतु हालात वर्ष 2025 की तरह 2026 में भी जस के तस बने हुए हैं। महिला हो या पुरुष, दोनों ही घाटों पर सुंदरता का भारी अभाव है। नदी तट पर पसरी गंदगी और अव्यवस्था को देखकर श्रद्धालुओं की उम्मीदों पर पूरी तरह पानी फिर गया है।
न प्रशासन जागा, न धाम समिति ने दिखाई रुचि
ताज्जुब की बात यह है कि एक तरफ जहां पूरे देश से श्रद्धालु यहां खिंचे चले आते हैं, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने नदी के संरक्षण पर कोई ध्यान नहीं दिया। इतना ही नहीं इस दिशा में न तो कुबेरेश्वर धाम समिति और न ही पंडित प्रदीप मिश्रा की ओर से ऐसे कोई ठोस प्रयास किए गए, जिससे सीवन नदी का स्वरूप निखर पाता और आने वाले भक्तों को स्वच्छ व सुंदर वातावरण मिल पाता।
भक्ति में फिर भी कोई कमी नहीं
अव्यवस्थाओं के बावजूद शिवभक्तों के उत्साह में कोई कमी नहीं है। विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित ने बताया कि 3 अगस्त को शाम 4 बजे विठलेश सेवा समिति नगर इकाई द्वारा सीवन नदी तट से पहली भव्य कांवड़ यात्रा उठाई जाएगी। इसके बाद 10, 17 और 25 अगस्त को भी विशाल यात्राएं निकाली जाएंगी।
स्टेशन से ही दंडवत पहुंच रहे भक्त
वर्तमान में भी सीवन तट पर पूजा सामग्री और कांवड़ की दुकानों के साथ मेले जैसा माहौल है। भक्त सीवन नदी से जल भरकर 11 किलोमीटर का पैदल सफर तय करते हुए कुबेरेश्वर धाम पहुंच रहे हैं। कई श्रद्धालु तो रेलवे स्टेशन से ही कुबेरेश्वर धाम तक दंडवत प्रणाम करते हुए जा रहे हैं।