
सीहोर। सनातन धर्म में अक्षय तृतीया का विशेष महत्व है। इसे एक अक्षय फल देने वाली तिथि माना गया है, जिसमें किया गया कोई भी शुभ कार्य कभी निष्फल नहीं होता। पंडित सुनील शर्मा के अनुसार अक्षय तृतीया एक अबूझ मुहूर्त है, यानी इस दिन किसी भी नए कार्य की शुरुआत के लिए पंचांग देखने या विशेष मुहूर्त निकालने की आवश्यकता नहीं होती। यह स्वयं सिद्ध मुहूर्त है।
पंडित सुनील शर्मा ने गणना के आधार पर बताया कि इस वर्ष वैशाख मास की तृतीया तिथि 19 अप्रैल दोपहर 12 बजकर 45 मिनट से प्रारंभ होगी, जो 20 अप्रैल सुबह 10 बजकर 21 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि की मान्यता के अनुसार दान-पुण्य और विशेष पूजा अर्चना के लिए सोमवार का दिन भी अत्यंत शुभ रहेगा।
चिरंजीवी भगवान परशुराम का प्राकट्य उत्सव
अक्षय तृतीया का दिन इसलिए भी खास है क्योंकि इसी शुभ घड़ी में जगत के पालनहार भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का जन्म हुआ था। पंडित शर्मा ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार त्रेता युग में महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका के आश्रम में भगवान परशुराम का प्राकट्य हुआ। वे सृष्टि के उन सात चिरंजीवियों में से एक हैं, जो आज भी पृथ्वी पर निवास करते हैं। अश्वत्थामा, राजा बलि, महर्षि वेदव्यास, हनुमान जी, विभीषण, कृपाचार्य और परशुराम जी को सप्त चिरंजीवी माना गया है जो अजर-अमर हैं।
स्वयं सिद्ध मुहूर्त, नवीन कार्यों के लिए सर्वोत्तम
पंडित सुनील शर्मा के अनुसार अक्षय तृतीया को अबूझ मुहूर्त माना गया है। इस दिन विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन संस्कार या नवीन व्यवसाय प्रारंभ करने के लिए किसी ज्योतिषी से मुहूर्त पूछने की जरूरत नहीं होती। पूरा दिन ही हर प्रकार के मांगलिक कार्यों के लिए श्रेष्ठ होता है। इस दिन सोने-चांदी की खरीदारी और नए निवेश को भी घर में समृद्धि लाने वाला माना गया है।
इन वस्तुओं के दान से मिलेगा विशेष पुण्य
धार्मिक मान्यताओं के अनुसारए अक्षय तृतीया पर किया गया जपए तपए हवन और दान कभी समाप्त नहीं होता अक्षय रहता है। इस दिन दान का विशेष महत्व है। पंडित जी ने बताया कि इस दिन सत्तू, गुड़, घी, शीतल जल, वस्त्र, मौसमी फल और अन्न का दान करना चाहिए। ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि के साथ सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं।