मानवता की मिसाल, सुकून की रसोई ने मरीजों के परिजनों को परोसी एक लाख नि:शुल्क थालियां

सीहोर। जिले में सेवा और समर्पण की एक अनूठी मिसाल पेश करते हुए टीम संडे का सुकून द्वारा संचालित सुकून की रसोई ने एक ऐतिहासिक मुकाम हासिल कर लिया है। जिला चिकित्सालय में इलाज के लिए आने वाले मरीजों के परिजनों को पिछले दो वर्षों से लगातार नि:शुल्क भोजन उपलब्ध कराने वाली इस रसोई में अब तक एक लाख थालियां परोसी जा चुकी हैं।

इस पहल की सबसे खास बात यह है कि यह पूरी तरह से जीरो वेस्ट अवधारणा पर आधारित है। यहां भोजन परोसने के लिए किसी भी तरह के सिंगल-यूज डिस्पोजल या प्लास्टिक का उपयोग नहीं किया जाता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का पूरा ध्यान रखते हुए पूरी शुद्धता, पौष्टिक और प्रेम के साथ भोजन कराया जाता है।
नवंबर 2024 से शुरू हुआ था सफर
यह मुहिम नवंबर 2024 में शुरू हुई थी, जो अब अपने सेवाकाल के 666 दिन पूरे कर चुकी है। इस अभियान से न केवल सीहोर और देश के विभिन्न हिस्सों के लोग, बल्कि विदेशों में रह रहे प्रवासी भी जुडक़र आर्थिक और नैतिक सहयोग दे रहे हैं।
आयोजनों का बदला स्वरूप
सुकून की रसोई ने समाज में एक नई सोच को जन्म दिया है। अब जिले के सैकड़ों परिवारों ने अपने बच्चों के जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ और बुजुर्गों की पुण्यतिथि जैसे विशेष अवसरों पर होने वाली खर्चीली पार्टियों के बजाय इस भोजन सेवा में अपना योगदान देना शुरू किया है। इस अनूठी पहल से जहां एक तरफ जरूरतमंदों का पेट भर रहा है, वहीं आयोजन करने वाले परिवारों को भी आत्मिक संतोष मिल रहा है।
सुबह और शाम दोनों समय मिल रहा भोजन
आम जनता से मिल रहे अपार स्नेह, सहयोग और दानदाताओं की दरियादिली के चलते इस रसोई का दायरा अब और बढ़ा दिया गया है। लोगों के निरंतर समर्थन से अब सुकून की रसोई के माध्यम से सुबह के समय के साथ-साथ शाम को भी भोजन का वितरण शुरू कर दिया गया है। इस कार्य में युवाओं के साथ-साथ कई सेवानिवृत्त वरिष्ठ नागरिक भी सेवाभाव के साथ प्रतिदिन अपनी सेवाएं दे रहे हैं। जिला चिकित्सालय में आने वाले असहाय लोगों के लिए यह रसोई किसी वरदान से कम साबित नहीं हो रही है।

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