तहसीलदार के खिलाफ आक्रोश, शिकायत नहीं फिर भी मंदिर निर्माण रुकवाने क्यों पहुंचे अधिकारी

सीहोर। आष्टा में प्रशासन और आस्था के बीच ठन गई है। बिना किसी ठोस आधार या लिखित शिकायत के श्री राधाकृष्ण मंदिर में चल रहे निर्माण कार्य में दखल देने पहुंचे तहसीलदार रामलाल पगारे अब सवालों के घेरे में हैं। सकल हिंदू समाज ने अधिकारी के इस व्यवहार पर नाराजगी जताते एसडीएम से जवाब मांगा है कि आखिर किसके इशारे पर मंदिर की छत ढलाई का काम रोकने की कोशिश की गई।
बता दें मामला 20 जनवरी बुधवार का है। मंदिर परिसर में छत डालने का कार्य चल रहा था, तभी बिजली गुल होने से पानी की किल्लत हो गई। इसी बीच तहसीलदार रामलाल पगारे मौके पर पहुंचे। प्रत्यक्षदर्शियों और समाजजनों का आरोप है कि तहसीलदार ने न केवल कार्य रुकवाने का प्रयास किया, बल्कि वहां मौजूद समाज के पदाधिकारियों के साथ अमर्यादित भाषा का प्रयोग भी किया। आरोप तो यहां तक है कि उन्होंने मंदिर के नवनिर्मित हिस्से को तोडऩे की धमकी तक दे डाली।
किसके इशारे पर आए तहसीलदार
सकल हिंदू समाज ने ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन से कुछ सवाल पूछे हैं, जिनमें तहसीलदार बिना किसी लिखित शिकायत या आदेश के धार्मिक स्थल पर क्यों पहुंचे। यदि कोई शिकायतकर्ता था तो उसका नाम सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया। धार्मिक आस्था से जुड़े निर्माण कार्य में बाधा डालने का अधिकार अधिकारी को किसने दिया। समाज का कहना है कि मंदिर परिसर के भीतर ही नियमानुसार मरम्मत कार्य किया जा रहा था। प्रशासनिक अधिकारी का ऐसा रवैया किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
एसडीएम ने दिया जांच का आश्वासन
मामले की गंभीरता को देखते हुए अनुविभागीय अधिकारी नितिन टाले के अनुसार सकल समाज द्वारा ज्ञापन प्राप्त हुआ है। मंदिर पुनर्निर्माण के दौरान तहसीलदार वहां पहुंचे थे, लेकिन वहां उनके बीच क्या बातचीत हुई, इसकी जानकारी अभी नहीं मिली है। तहसीलदार का पक्ष जानने और पूरी स्थिति स्पष्ट होने के बाद विधिवत कार्रवाई की जाएगी।
आंदोलन की चेतावनी
मंदिर समिति और समाज के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि इस मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारी पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में आंदोलन का रास्ता चुना जाएगा। समाज ने चेतावनी दी है कि धार्मिक स्थलों की गरिमा के साथ किसी को भी खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।



