आशा कार्यकर्ताओं का कलेक्टोरेट के सामने चक्काजाम, पुराना इंदौर-भोपाल मार्ग ठप
लंबित मानदेय न मिलने और 24 घंटे काम कराने के विरोध में सडक़ पर बैठीं सैकड़ों कार्यकर्ता, सरकार के खिलाफ की नारेबाजी

सीहोर। जिला मुख्यालय पर सोमवार को अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर आशा कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में एकजुट हुईं आशा कार्यकर्ताओं ने पुराने भोपाल-इंदौर मार्ग पर कलेक्टोरेट के ठीक सामने सडक़ पर बैठकर चक्काजाम कर दिया। एकाएक हुए इस प्रदर्शन से व्यस्त मार्ग पर यातायात पूरी तरह बाधित हो गया और देखते ही देखते सडक़ के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। अपनी मांगों के समर्थन में अड़ी कार्यकर्ता तपती सडक़ पर ही धरने पर बैठ गईं।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही आशा कार्यकर्ता रानी राठौर ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं से दिन-रात यानी 24-24 घंटे काम कराया जाता है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें समय पर वेतन नहीं मिल रहा है। लंबे समय से मानदेय लंबित होने के कारण सभी कार्यकर्ताओं के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है और वे मानसिक रूप से परेशान हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग को कई बार अवगत कराने के बाद भी उनकी जायज समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
बैंगनी साड़ी पहनकर सडक़ पर दी रैलियां
आंदोलन के दौरान कलेक्टोरेट मार्ग और वेदांता हार्ट केयर हॉस्पिटल के सामने का नजारा पूरी तरह बदला हुआ नजर आया। सैकड़ों की तादाद में आशा कार्यकर्ता अपनी पारंपरिक बैंगनी रंग की साड़ी पहनकर बीच सडक़ पर बैठ गईं। इस दौरान उन्होंने अपनी मांगों को लेकर शासन-प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और जल्द से जल्द भुगतान की मांग की। चक्काजाम की सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात रहा और अधिकारियों ने कार्यकर्ताओं को समझाने व रास्ता खुलवाने का लगातार प्रयास किया।
मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
आशा कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यह कोई एक दिन का प्रदर्शन नहीं है। जब तक उनका रुका हुआ पूरा मानदेय जारी नहीं किया जाता और भविष्य में हर महीने समय पर मानदेय मिलने की ठोस व्यवस्था नहीं होती, तब तक उनका यह विरोध प्रदर्शन और चरणबद्ध आंदोलन लगातार जारी रहेगा।



