जिले में भगोरिया मेले की शुरुआत, भेरुंदा के लाल माटी गांव में लगा मेला
परंपरा के साथ बदला पहनावा, अब धोती-कुर्ता की जगह जींस-टीशर्ट और मांदल की जगह डीजे की धुन पर थिरक रहे युवा

सीहोर। आदिवासी संस्कृति और लोक पर्व के अनूठे संगम भगोरिया मेले का जिले में उत्साहपूर्वक आगाज हो गया है। बुधवार को भेरुंदा ब्लॉक के ग्राम लाल माटी से इस मेले की शुरुआत हुई, जहां आदिवासी समाज के लोगों ने अपनी परंपरा और संस्कृति का जमकर प्रदर्शन किया। बता दें जैसे-जैसे होली नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे भगोरिया का रंग गहराने लगा है। हालांकि बदलते समय के साथ इस पारंपरिक मेले के स्वरूप, पहनावे और वाद्य यंत्रों में बड़ा बदलाव भी नजर आने लगा है।
इस बार भगोरिया मेले में एक बड़ा परिवर्तन देखने को मिल रहा है। कभी पारंपरिक धोती-कुर्ता और साफे में नजर आने वाले आदिवासी युवा अब आधुनिकता के रंग में रंगे दिख रहे हैं। मेले में पहुंचने वाले अधिकांश युवा अब जींस और टीशर्ट पहनकर शामिल हो रहे हैं। न केवल पहनावा, बल्कि श्रृंगार और शहरी संस्कृति का असर साफ नजर आ रहा है।
मांदल और ढोलक की जगह डीजे ने ली
बता दें भगोरिया की असली पहचान उसकी थाप और पारंपरिक वाद्य यंत्रों से होती है। पहले जहां ढोलक, मांदल और झांझ-मंजीरों की गूंज सुनाई देती थी, अब उनकी जगह डीजे और बैंड का चलन बढ़ गया है। बुधवार को आयोजित भगोरिया मेले में युवाओं की टोली डीजे की धुन पर थिरकती नजर आई हैं। हालांकि बुजुर्ग आज भी मांदल की थाप पर ही उत्साह नृतय करते नजर आए।
उत्साह में भी बदलाव
बुजुर्गों ने बताया कि पहले भगोरिया का उत्साह अलग ही होता था। अक्सर इन दिनों तक फसल कट जाती थी, जिससे ग्रामीण आर्थिक रूप से निश्चिंत होकर मेले का आनंद लेते थे, लेकिन इस बार अभी खेतों में फसल खड़ी है्र जिससे काम के दबाव के बीच ग्रामीण मेले में पहुंच रहे हैं।
जिले भर में यहां लगेगा भगोरिया हाट
लाल माटी से शुरू हुआ यह सिलसिला अब जिले के विभिन्न क्षेत्रों में होली तक अनवरत जारी रहेगा। आने वाले दिनों में हाट बाजार वाले दिन बिलकिसगंज, लाडकुई, ब्रिजिशनगर, कोलारडेम, जीवनताल, बावडिय़ाचोर, नादान, चकल्दी, भैंसान, पिपलानी और बसंतपुर गांव में भगोरिया मेले का आयोजन होगा।



