
सीहोर। श्रावण मास की पूर्णिमा के पावन अवसर पर सनातन परंपरा के अनुसार विप्र समाज द्वारा वैदिक रीति-रिवाज के साथ श्रावणी उपाकर्म पर्व श्रद्धा और भक्तिभाव से मनाया जाएगा। इस अवसर पर ब्राह्मण समाज के लोग आत्म-शुद्धि, ऋषि पूजन और अपने कर्तव्यों के प्रति पुन: समर्पित होने का संकल्प लेंगे।
पंडित सुनील शर्मा ने बताया कि श्रावणी उपाकर्म सनातन संस्कृति में विप्र बंधुओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। श्रावण पूर्णिमा पर विप्रजन वेद मंत्रों के उच्चारण के साथ आत्म-शोधन की प्रक्रिया पूरी करेंगे। यह पर्व स्वाध्याय, ज्ञान-साधना और आध्यात्मिक पुनर्जागरण का प्रतीक है।
शुभ मुहूर्त का समय
पंडित सुनील शर्मा के अनुसार पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ 27 अगस्त को सुबह 9.11 बजे से होगा, जो 28 अगस्त को सुबह 9.50 बजे तक रहेगी। इसी अवधि में धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए जाएंगे।
हेमाद्रि संकल्प और दसविधि स्नान
अनुष्ठान का शुभारंभ जिले की नदियों, पोखरों और तालाबों के तट पर हेमाद्रि संकल्प के साथ होगा। इसके बाद शास्त्रीय परंपरा के अनुसार दसविधि स्नान किया जाएगा। इसमें भस्म, पवित्र मिट्टी, सप्त औषधि, पंचगव्य दूध, दही, घी, गोबर, गोमूत्र, दूर्वा, कुशा, फल और तीर्थ जल जैसे विशेष द्रव्यों का उपयोग कर वेद मंत्रों के साथ स्नान की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
तर्पण, हवन और नवीन यज्ञोपवीत धारण
दसविधि स्नान के बाद देव, ऋषि और पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए तर्पण किया जाएगा। इसके उपरांत वेद मंत्रों के साथ शिव परिवारए माता गायत्री और सप्तऋषियों का पूजन एवं हवन संपन्न होगा। अनुष्ठान के अंतिम चरण में विप्र बंधु पुराने जनेऊ का त्याग करेंगे और माता गायत्री का ध्यान करते हुए पूरे विधि-विधान से नवीन यज्ञोपवीत धारण करेंगे।