
सीहोर। राजस्व प्रशासन में जारी अनियमितता और भ्रष्टाचार के खिलाफ जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। कलेक्टर बालागुरु के. ने जावर तहसील में पदस्थ पटवारी धर्मेंद्र सिंह राठौर के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अदालत में केस (अभियोजन) चलाने की आधिकारिक स्वीकृति दे दी है। यह सख्त कदम लोकायुक्त में दर्ज शिकायत, जांच में मिले ठोस सबूतों और एफएसएल रिपोर्ट के आधार पर उठाया गया है।
जारी आदेश के अनुसार जावर तहसील के हल्का नंबर 24 में पदस्थ पटवारी धर्मेंद्र सिंह राठौर के खिलाफ एक किसान/शिकायतकर्ता ने भूमि नामांतरण कराने के एवज में रिश्वत मांगने की शिकायत लोकायुक्त कार्यालय में दर्ज कराई थी। शुरुआत में पटवारी द्वारा 10 हजार रुपये की मांग की जा रही थी। शिकायत की गोपनीयता और सत्यता जांचने के लिए लोकायुक्त निरीक्षक मुकेश तिवारी ने शिकायतकर्ता को एक डिजिटल वॉइस रिकॉर्डर देकर भेजा। रिकॉर्डिंग के दौरान पटवारी धर्मेंद्र सिंह 8 हजार रुपये रिश्वत लेने पर राजी हो गया।
एफएसएल जांच में खुली पोल
रिकॉर्डेड बातचीत के आधार पर लोकायुक्त की टीम ने स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में प्रारंभिक पंचनामा तैयार कर जावर में ट्रैप की कार्रवाई की। इसके बाद तहसील कार्यालय जावर से वॉइस रिकॉर्डर और मेमोरी कार्ड को विधिवत सीलबंद कर जप्त किया गया। आरोपी पटवारी की आवाज का सैंपल लेकर जांच के लिए स्टेट फॉरेंसिक साइंस लैब भोपाल भेजा गया था। एफएसएल लैब से आई वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट में रिकॉर्डेड आवाज पटवारी धर्मेंद्र सिंह राठौर की ही होने की 100 प्रतिशत पुष्टि हुई।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज हुआ केस
लोक सेवक के पद का दुरुपयोग करते हुए नामांतरण के नाम पर घूस मांगने पर आरोपी पटवारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 संशोधित 2018 की धारा 7 के तहत अपराध दर्ज किया गया था।
कलेक्टर ने माना पर्याप्त हैं सबूत, अब अदालत में होगी पेशी
मामले की समस्त केस डायरी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के गहन परीक्षण के बाद कलेक्टर बालागुरु के. ने माना कि आरोपी लोकसेवक के खिलाफ अदालत में मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त और पुख्ता आधार मौजूद हैं। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा के तहत सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी अनिवार्य होने के कारणए कलेक्टर ने पटवारी के विरुद्ध न्यायालय में अभियोजन चलाने की स्वीकृति जारी कर दी है। अब लोकायुक्त पुलिस जल्द ही कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करेगी।