शारदीय नवरात्रि की शुरुआत, सलकनपुर में उमड़ा आस्था का सैलाब, सुबह से उमड़े हजारों श्रद्धालु

सीहोर। प्रसिद्ध और आस्था के बड़े केंद्र सलकनपुर स्थित मां विजयासन देवी धाम में शारदीय नवरात्रि के पहले दिन से ही भक्तों का तांता लगा हुआ है। आज रविवार और नवरात्रि का पावन पहला दिन होने के कारण सुबह से ही मंदिर परिसर, सीढ़ी मार्ग और पूरे क्षेत्र में भारी भीड़ देखने को मिल रही है। सैकड़ों श्रद्धालु कतारों में लगकर माता के दर्शन कर चुके हैं और जिला प्रशासन के अनुसार रात तक यहां दर्शन करने वाले भक्तों की संख्या 1 लाख के पार पहुंच सकती है।
बता दें नवरात्रि के पहले दिन घरों और मंदिरों में घटस्थापना के साथ आदिशक्ति माँं दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जा रही है। सलकनपुर के इस पावन मंदिर में भी सुबह से ही विशेष अनुष्ठान, हवन और पूजन का दौर लगातार जारी है। पूरा मंदिर परिसर जय माता दी के जयकारों और भक्तिमय भजनों से गूंज रहा है। दूर-दूर से आए श्रद्धालु माता के दर्शन कर अपने परिवार की सुख, शांति और समृद्धि की मंगल कामना कर रहे हैं।

1000 फीट की ऊंचाई पर विराजमान हैं मां
बता दें विंध्य पर्वत श्रृंखलाओं पर करीब 1000 फीट की ऊंचाई पर स्थित मां विजयासन देवी का यह मंदिर अपनी चमत्कारी मान्यताओं और इतिहास के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। पौराणिक मान्यता, धार्मिक कथाओं के अनुसार मां विजयासन को माता पार्वती का ही एक शक्तिशाली स्वरूप माना जाता है। पौराणिक प्रसंगों में उल्लेख मिलता है कि देवी द्वारा भयंकर असुर रक्तबीज का वध करने के बाद देवताओं को विजयश्री प्राप्त हुई थी। इसके पश्चात देवताओं ने यहां माता को विजयासन (विजय का आसन) प्रदान किया, तभी से इस पवित्र स्थल का नाम विजयासन धाम पड़ गया।
बंजारों को मिल गए थे गुम हुए मवेशी
इस स्थान के इतिहास को लेकर एक अन्य लोक कथा भी काफी प्रचलित है। कहा जाता है कि करीब 300 साल पहले इस क्षेत्र में बंजारों के कुछ मवेशी कहीं खो गए थे। भटकते-भटकते बंजारों ने जब माता के बताए अनुसार यहां विधि-विधान से पूजा की तो उनके खोए हुए सभी पशु सुरक्षित वापस मिल गए। इस चमत्कार से अभिभूत होकर उन बंजारों ने ही इस भव्य मंदिर का निर्माण करवाया था।
प्रशासन द्वारा सुरक्षा और सुविधाओं के पुख्ता इंतजाम
नवरात्रि के नौ दिनों तक चलने वाले इस महाउत्सव में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट ने सुरक्षा और व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए हैं। मंदिर परिसर, पार्किंग और अन्य प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा की दृष्टि से भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। भीड़ को व्यवस्थित रखने और सुगम दर्शन के लिए विशेष बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई है, ताकि भक्तों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
रोपवे की विशेष सुविधा
बुजुर्ग, बीमार और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए रोपवे की सुविधा चालू है। इसके अलावा सामान्य भक्त सडक़ मार्ग और सीढिय़ों के रास्ते भी लगातार मंदिर पहुंच रहे हैं। प्रशासन रात तक बढऩे वाली भीड़ को लेकर पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है।
नौ दिनों तक रहता है मेले जैसा माहौल
राजधानी भोपाल से लगभग 75 किलोमीटर दूर स्थित सलकनपुर धाम में यूं तो साल भर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन शारदीय और चैत्र नवरात्रि के पवित्र अवसरों पर इस पूरे क्षेत्र का स्वरूप ही बदल जाता है। नौ दिनों तक यहां मेला जैसा भव्य माहौल रहता है, जहां मध्य प्रदेश के अलावा देश के अन्य राज्यों से भी लाखों की संख्या में श्रद्धालु अपनी मन्नतें लेकर माता के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचते हैं।

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