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रक्षाबंधन महामंडल विधान का समापन, 150 अघ्र्य चढ़ाकर की 700 मुनिराजों की आराधना, 108 बच्चों ने किया भावपूर्ण पडग़ाहन

सीहोर। पाश्र्वनाथ दिगंबर जैन दिव्योदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र किला मंदिर आष्टा में आयोजित तीन दिवसीय रक्षाबंधन महामंडल विधान का शुक्रवार को आध्यात्मिक, धार्मिक और उल्लासपूर्ण वातावरण में समापन हुआ। अंतिम दिन अकंपनाचार्य आदि 700 निग्र्रंथ मुनिराजों की आराधना करते हुए श्रद्धालुओं ने विधि-विधान और भक्तिभाव के साथ 150 अघ्र्य समर्पित किए। इसी के साथ श्री श्रेयांसनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक पर निर्वाण कांड पाठ का उच्चारण करते हुए जिनालयों में निर्वाण लाडू चढ़ाया गया।
तीन दिवसीय आयोजन का सबसे भावुक और आकर्षक केंद्र 108 बालकों द्वारा किया गया मुनिराजों का पडग़ाहन रहा। नन्हें-मुन्ने बच्चों ने पूरी धार्मिक विधि, अत्यंत श्रद्धा, विनय और समर्पण के साथ मुनिराजों का पडग़ाहन किया। बच्चों को अपनी प्राचीन धार्मिक परंपरा और संस्कारों से जुड़ते देख मंदिर परिसर में मौजूद हजारों श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। समाजजनों ने बच्चों के इस धार्मिक उत्साह की प्रशंसा की। उपस्थित प्रबुद्धजनों का कहना था कि बाल्यकाल से ही बच्चों में संतों के प्रति विनय और संयम के बीज बोना ही अपनी गौरवशाली संस्कृति को जीवंत रखने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
वैदिक मंत्रोचार के साथ समर्पित किए 150 अघ्र्य
समापन अवसर पर प्रात: 7 बजे से ही पूजन-विधान की क्रियाएं प्रारंभ हो गई थीं। 700 निग्र्रंथ मुनिराजों के त्याग, तप और संयम का स्मरण करते हुए श्रद्धालुओं ने भक्तिमय भजनों की धुन पर 150 अघ्र्य समर्पित किए। श्रद्धालुओं ने इस अवसर को आत्मकल्याण और पुण्यार्जन का पावन अवसर माना।
श्रेयांसनाथ भगवान को चढ़ाया निर्वाण लाडू
विधान के पावन अवसर पर 11वें तीर्थंकर श्री श्रेयांसनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक पर्व भी अपार श्रद्धा के साथ मनाया गया। निर्वाण कांड पाठ के वाचन के पश्चात किला मंदिर सहित नगर के सभी दिगंबर जैन मंदिरों में श्रद्धालुओं ने भगवान के चरणों में निर्वाण लाडू समर्पित किया। मोक्ष कल्याणक पर श्रद्धालुओं ने सन्मार्ग, संयम और आत्मकल्याण के पथ पर चलने का संकल्प लिया।

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