पं. मिश्रा की कथा सुनने अमेरिका-बांग्लादेश से आए श्रद्धालु…

सीहोर। भगवान की आराधना करने वाला भक्त कभी अकेला और निराश नहीं रहता। भगवान अपने प्रत्येक भक्त की पुकार सुनते हैं और भक्ति में वह शक्ति है, जो मनुष्य के जीवन को नई दिशा दे सकती है। भगवान कब और कैसे किसी मनुष्य की जिंदगी का पासा पलट दें, यह कोई नहीं जानता। इसलिए भक्त को भगवान पर अटूट विश्वास रखते हुए प्रतिदिन उनकी आराधना करनी चाहिए। मनुष्य जीवन अत्यंत दुर्लभ है और अनेक योनियों के बाद यह देह प्राप्त होती है। भक्ति में दिखावा होने पर भगवान की प्राप्ति कठिन हो जाती है।

उक्त विचार कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कही। शुक्रवार को शहर के बड़ा बाजार स्थित अग्रवाल धर्मशाला में अग्रवाल महिला मंडल के तत्वावधान में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी के विवाह की मनोहारी झांकी सजाई गई। जैसे ही विवाह प्रसंग का वर्णन हुआ, कथा पंडाल भक्तिभाव से भर गया और श्रद्धालु भगवान के जयकारे लगाने लगे।
अग्रवाल धर्मशाला बनी आस्था का केंद्र
श्रीमद्भागवत कथा को लेकर अग्रवाल महिला मंडल के साथ ही शहरवासियों में भी विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। बिना किसी बड़े प्रचार-प्रसार के प्रतिदिन सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु बड़ा बाजार स्थित अग्रवाल धर्मशाला पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए मंडल की ओर से एलईडी एवं पंडाल की व्यवस्था की गई है, इसके बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु धर्मशाला के बाहर ओटलों, सडक़ों और गलियों में तिरपाल बिछाकर कथा का श्रवण कर रहे हैं। धर्मशाला परिसर से लेकर आसपास का क्षेत्र पूरी तरह भक्तिमय नजर आ रहा है। बाहर से आने वाले श्रद्धालु कथा प्रारंभ होने से पहले व्यास पीठ के दर्शन करते हैं और पंडित प्रदीप मिश्रा के मुखारविंद से कथा श्रवण करते हैं। श्रद्धालुओं की आस्था के चलते अग्रवाल धर्मशाला इन दिनों तीर्थ स्थल जैसा वातावरण प्रस्तुत कर रही है।

अमेरिका, बांग्लादेश और कनाडा से पहुंचे श्रद्धालु
कथा में देश ही नहीं, विदेशों से भी श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। अमेरिका से आए दीपेश भाई अपनी धर्मपत्नी के साथ पिछले दो दिनों से धर्मशाला के बाहर बैठकर अन्य श्रद्धालुओं की तरह कथा का श्रवण कर रहे हैं। इसके अलावा बांग्लादेश और कनाडा से आए श्रद्धालुओं ने भी पंडित प्रदीप मिश्रा से आशीर्वाद लिया। अमेरिका से आए दीपेश भाई ने बताया कि वे अपनी धर्मपत्नी के साथ सामान्य श्रद्धालुओं की तरह कथा का श्रवण कर रहे हैं। उनकी धर्मपत्नी ने कहा कि कथा श्रवण और भगवान के प्रति विश्वास से उन्हें आध्यात्मिक संबल मिला है। वे भगवान पर विश्वास रखते हुए अपने प्रयास निरंतर जारी रखती हैं।
निर्मल मन से ही परमात्मा की अनुभूति
पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि जिनका मन शुद्ध और पवित्र होता है, वही परमात्मा की अनुभूति कर सकते हैं। ईश्वर को छल-कपट नहीं, बल्कि निश्छल प्रेम चाहिए। यदि मन में कपट या स्वार्थ हो तो ईश्वर की प्राप्ति संभव नहीं है। उन्होंने कथा स्थल के बाहर बैठे श्रद्धालुओं का उदाहरण देते हुए कहा कि बड़ी संख्या में लोग भवन के बाहर सडक़, ओटलों, गलियों और आसपास के घरों में बैठकर केवल माइक की आवाज के माध्यम से कथा सुन रहे हैं और भगवान पर विश्वास रखते हुए भक्ति में लीन हैं। यह आस्था का भाव दर्शाता है। उन्होंने कहा कि ईश्वर के नाम का स्मरण करने के लिए जहां भी स्थान मिले, वहीं बैठकर प्रभु का ध्यान करना चाहिए। भगवान की भक्ति के लिए स्थान और परिस्थितियां बाधा नहीं बनतीं, बल्कि सच्ची श्रद्धा और निर्मल भाव ही सबसे महत्वपूर्ण हैं।
कृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग ने बांधा समां
कथा के छठवें दिन भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी के विवाह प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया गया। इस अवसर पर सुंदर झांकी सजाई गई। पंडित मिश्रा ने कहा कि जब मनुष्य के सत्कर्मों का अभिमान समाप्त हो जाता है और धरती पर अधर्म बढ़ता है, तब भगवान विभिन्न रूपों में अवतार लेकर अपने भक्तों का उद्धार करते हैं। श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक कथा नहीं, बल्कि जीवन में धर्मए सदाचार और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। कथा श्रवण से मनुष्य को भगवान के स्वरूप और भक्ति के महत्व का ज्ञान प्राप्त होता है।
कल होगा कथा का समापन, निकलेगा चल समारोह
अग्रवाल महिला मंडल की अध्यक्ष रुक्मणी रोहिला ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन शनिवार को दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक कथा का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद सादगीपूर्ण ढंग से चल समारोह निकाला जाएगा।

Exit mobile version