
सीहोर। शारदीय नवरात्रि पर्व के दौरान जिले के सलकनपुर स्थित मां विजयासन धाम पर श्रद्धालु अपने वाहनों से दर्शन के लिए उपर तक जा सकेंगे। हालांकि उपर पार्किंग फुल होने पर उन्हें कुछ समय के लिए नीचे ही इंतजार करना पड़ सकता है। यह व्यवस्था होने से ऐसे श्रद्धालु जो दूर-दूर से अपने वाहनों से आते हैं उन्हें राहत मिलेगी, लेकिन उनसे सड़क सुरक्षा निधि से नाम से वसूली भी होगी। दरअसल पिछले कुछ वर्षों में नवरात्रि के दौरान सलकनपुर में चल रही टैक्सियों को ही उपर तक जाने की छूट मिलती थी। ऐसे में वाहन लेकर आने वाले श्रद्धालुओं को भी टैक्सियों से ही उपर तक आना-जाना पड़ता था, लेकिन इस बार व्यवस्थाओं में बदलाव करते हुए सभी के लिए उपर तक जाने की छूट दी गई है। इस दौरान चार पहिया वाहनों को 20 रूपए एवं दो पहिया वाहनों को 10 रूपए की रसीद कटानी होगी, जो सड़क सुरक्षा निधि के नाम से होगी। यह राशि अवैध तरीकों से वसूली जा रही है।
सुरक्षा में तैनात रहेंगे 200 से अधिक पुलिसकर्मी-
एसडीओपी बुधनी रवि शर्मा के मुताबिक नवरात्रि के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा-व्यवस्था के लिए सलकनपुर में 200 से अधिक पुलिसकर्मी सहित अन्य सुरक्षाकर्मी तैनात रहेंगे। डीएसपी रैंक के अधिकारियों की भी ड्यूटी रहेगी। कई थानों के थाना प्रभारी भी यहां पर ड्यूटी में तैनात रहेंगे। मंदिर परिसर सहित जगह-जगह सीसीटीव्ही कैमरों से भी निगरानी की जाएगी। पुलिस के जवान सिविल ड्रेस में भी सुरक्षा व्यवस्था के लिए तैनात किए जाएंगे। वाहनों के लिए पार्किंग व्यवस्थाएं अलग-अलग की गईं हैं, ताकि यातायात बाधित न हो। इसके अलावा श्रद्धालुओं के लिए पेयजल सहित अन्य सुविधाएं भी यहां पर जुटाई गईं हैं।
सुबह 3 बजे से रात 12 बजे तक खुला रहेगा मंदिर-
श्रीदेवी मंदिर समिति सलकनपुर के सचिव आरके दुबे ने बताया कि श्रद्धालुओं के लिए दर्शन करने के लिए मंदिर सुबह 3 बजे से लेकर रात 12 बजे तक पूरे समय खुला रहेगा। इस दौरान श्रद्धालु यहां पर दर्शन के लिए पहुंच सकते हैं। नौ दिनों तक मातारानी की विशेष पूजा-अर्चना होगी। नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त में घट स्थापना की जाएगी। अष्टमी के दिन हवन होगा एवं इस दिन रातभर मंदिर खुला रहेगा।
सड़क सुरक्षा निधि के नाम पर हो रही वाहन चालकों से वसूली-
इधर सलकनपुर में दो एवं चार पहिया वाहनों से दर्शन के लिए उपर जाने वाले श्रद्धालुओं से सड़क सुधार सहयोग निधि के नाम से वसूली भी हो रही है। नवरात्रि के दौरान यह वसूली ज्यादा होगी, क्योंकि प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पर पहुंचते हैं। सलकनपुर में सड़क मार्ग लोक निर्माण विभाग द्वारा तैयार किया गया है और इस सड़क की ग्यारंटी भी लोक निर्माण विभाग के पास थी। हालांकि अब पांच साल पूरे हो गए हैं, लेकिन मंदिर समिति द्वारा वर्षों से सड़क सुधार सहयोग निधि के नाम से वसूली की जा रही है। ऐसे में यह राशि अब तक करोड़ों में हो गई है और इसका कोई हिसाब भी नहीं है। नाम नहीं छापने की शर्त पर कई जनप्रतिनिधि एवं मंदिर समिति से जुड़े कर्मचारी एवं पदाधिकारी भी बताते हैं कि इस राशि का कोई हिसाब नहीं है। यह सीधे तौर पर जहां श्रद्धालुओं की जेब पर डाका है तो वहीं इस राशि को कहां जमा किया जा रहा है इसकी कोई जानकारी नहीं है। ठेकेदार के माध्यम से यह राशि वसूल की जा रही है। अब यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि यदि ठेकेदार राशि वसूल रहा है तो फिर गाड़ी चोरी की जिम्मेदारी भी वह ले।
300 साल से ज्यादा का है सलकनपुर का इतिहास-
सीहोर जिले के सलकनपुर में एक हजार फीट उंचे विंध्य पर्वत पर माता विजयासन देवी का मंदिर है। यह देश के प्रसिद्ध शक्तिपीठों में से एक है। पुराणों के अनुसार देवी विजयासन माता पार्वती का ही अवतार हैं। जिन्होंने देवताओं के आग्रह पर रक्तबीज नामक राक्षस का वध कर सृष्टि की रक्षा की थी। रक्तबीज का संहार कर विजय पाने पर देवताओं ने यहां माता को जो आसन दिया, वही विजयासन धाम के नाम से विख्यात हुआ और माता का यह रूप विजयासन देवी कहलाया। एक किवदंती यह भी प्रचलित है कि लगभग 300 साल पहले बंजारे अपने पशुओं के साथ जब इस स्थान पर विश्राम करने के लिए रूके, तब अचानक उनके सारे पशु गायब हो गए। बहुत ढूंढने के बाद भी पशु नहीं मिले। तभी एक बुजुर्ग बंजारे को एक बालिका दिखाई दी। उस बुजुर्ग ने उस बालिका से पशुओं के बारे में पूछा तो उसने कहा कि इस स्थान पर पूजा-अर्चना कीजिए आपको सारे पशु वापस मिल जाएंगे और हुआ भी वैसा ही। अपने खोए हुए पशु वापस मिलने पर बंजारों ने उस स्थान पर मंदिर का निर्माण किया। तभी से यह स्थल शक्ति पीठ के रूप में स्थापित हो गया। देशभर से हजारों श्रद्धालु प्रतिदिन माता विजयासन के दर्शन एवं पूजा अर्चना के लिए आते हैं। नवरात्रि में यहां विशाल मेला लगता है। शारदीय नवरात्रि पर लाखों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए आते हैं। यह भोपाल से 75 किलोमीटर दूर सीहोर जिले के सलकनपुर नामक गांव के में स्थित है। मंदिर परिसर तक रोपवे और सड़क मार्ग के साथ ही सीढ़ी मार्ग से भी जाया जा सकता है। मंदिर परिसर तक लगभग 1400 सौ सीढ़ियां हैं।



