
सीहोर। जिले के ग्रामीण इलाकों में बिजली कंपनी की जानलेवा लापरवाही के खिलाफ किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है। सीहोर जिले के बड़वेली, चंदेरी, बिलकिसगंज, पचामा और जामुनिया सहित दर्जनों गांवों के सैकड़ों किसान समाजसेवी एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में भोपाल स्थित मध्य प्रदेश विद्युत मंडल के गोविंदपुरा मुख्यालय पहुंचे। यहां किसानों ने एमडी कार्यालय का घेराव कर करीब तीन घंटे तक उग्र धरना-प्रदर्शन किया और दोषी अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
किसानों ने प्रबंध निदेशक ऋषि गर्ग को ज्ञापन सौंपते हुए बिजली कंपनी पर गंभीर आरोप लगाए। किसानों ने बताया कि हाल ही में ग्राम बड़वेली निवासी किसान सतीश मेवाड़ा खेत पर काम करते समय नीचे झूल रही 11 केवी विद्युत लाइन की चपेट में आ गए। इस हादसे में उन्हें अपना एक हाथ गंवाना पड़ा।
किसानों ने बताया कि बड़वेली क्षेत्र में जर्जर तारों के कारण अब तक 5 किसान करंट की चपेट में आ चुके हैं। इनमें से 3 किसानों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि 2 गंभीर रूप से घायल किसानों के हाथ काटने पड़े हैं। खेतों और गांवों में मौत बनकर झूल रहे इन तारों व खंभों की शिकायत बार-बार करने के बावजूद स्थानीय अधिकारी कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।
मुख्यमंत्री और मंत्रियों के आदेश भी बेअसर
प्रदर्शन में शामिल ग्राम बड़वेली के किसान प्रेम सिंह मेवाड़ा ने बताया कि वे इस समस्या को लेकर पहले भी मुख्यमंत्री निवास, ऊर्जा मंत्री और कलेक्टर कार्यालय को कई बार गुहार लगा चुके हैं।
अधिकारियों के रवैये पर उठाए सवाल
किसानों के मुताबिक इस मामले में मुख्यमंत्री निवास से सीहोर अधीक्षण यंत्री को फोन पर निर्देश दिए गए थे। ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर ने भी लिखित और फोन पर एमडी ऋषि गर्ग को दोषी अफसरों पर कार्रवाई व पीडि़त को आर्थिक मदद के निर्देश दिए थे। यहां तक कि जिले की प्रभारी मंत्री कृष्णा गौर भी लिखित आदेश दे चुकी हैं। इसके बावजूद बिजली कंपनी के अफसर मुख्यमंत्री, ऊर्जा मंत्री और प्रभारी मंत्री के आदेशों को ठेंगे पर रखकर मौज काट रहे हैं।
मानवाधिकार और महिला आयोग तक पहुंचा मामला
तीन घंटे चले इस धरने के बाद एमडी ऋषि गर्ग ने खुद किसानों के बीच आकर ज्ञापन लिया और दोषी अधिकारियों के विरुद्ध जांच कर कार्रवाई करने तथा पीडि़त किसान को नियमानुसार राहत दिलाने का भरोसा दिया।
इसके बाद किसान प्रतिनिधिमंडल ने समाजसेवी एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष एमपी सिंह तथा महिला आयोग में भी न्याय की गुहार लगाई। महिला आयोग की सचिव ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रतिनिधिमंडल को बैठक कक्ष में बुलाया और पीडि़त किसान की पत्नी व छोटे-छोटे बच्चों को न्याय दिलाने के लिए इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराने का ठोस आश्वासन दिया।
मांगें पूरी न होने पर राजधानी में डेरा डालो
किसानों ने बिजली कंपनी को सख्त चेतावनी दी है। किसानों की मांग हैं कि किसान सतीश मेवाड़ा को 25 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। पीडि़त परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। विद्युत मंडल सीहोर के दोषी अधिकारियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई हो। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि ये मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं तो सीहोर के साथ-साथ भोपाल, शाजापुर और उज्जैन जिले के किसान भी इस आंदोलन से जुड़ेंगे। गांव-गांव में चौपाल लगाकर किसानों को लामबंद किया जाएगा और हजारों की संख्या में किसान राजधानी भोपाल पहुंचकर अनिश्चितकालीन डेरा डालेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।