दोहरी समस्याओं से जूझ रहे किसान: धान की फसल बचाने नहर से पानी की मांग, पंजीयन की तारीख बढ़ाने की गुहार

सीहोर। जिले की रेहटी तहसील के किसान इन दिनों दोहरी समस्याओं से जूझ रहे हैं। एक तरफ जहां कम बारिश के कारण धान की फसल सूखने की कगार पर पहुंच गई है, वहीं दूसरी तरफ बटाई पर जमीन लेकर खेती करने वाले किसानों के धान पंजीयन पोर्टल में तकनीकी दिक्कतों के कारण पंजीयन नहीं हो पा रहे हैं। समस्याओं से परेशान किसानों ने जिला प्रशासन से कोलार डैम से पानी छोडऩे और पंजीयन की अंतिम तिथि बढ़ाने की मांग की है।
रेहटी तहसील के ग्राम मकोडिय़ा, नीमखेड़ी, भोगरा और इटारसी सहित आसपास के कई गांवों के किसान कलेक्ट्रेट पहुंचे। किसानों ने कलेक्टर बालागुरु के. को आवेदन सौंपकर बताया कि इस वर्ष कम बारिश होने के कारण खेतों में नमी खत्म हो चुकी है और धान की फसल पानी के अभाव में सूखकर नष्ट हो रही है।
किसानों ने कहा कि जलस्तर नीचे जाने के कारण वे ट्यूबवेल या अन्य संसाधनों से भी सिंचाई करने में असमर्थ हैं। किसानों की आय का मुख्य साधन खेती ही है, जिससे उनके परिवार का भरण-पोषण होता है। अगर जल्द पानी नहीं मिला तो फसल पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी। किसानों ने कलेक्टर से गुहार लगाई है कि कोलार डैम से कम से कम 10 दिनों के लिए नहरों में पानी छोड़ा जाए, ताकि फसल को बचाया जा सके।
पंजीयन में आ रही तकनीकी दिक्कतें
दूसरी ओर रेहटी तहसील के किसानों ने तहसील कार्यालय पहुंचकर तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। किसानों का कहना है कि उन्होंने वर्ष 2026-27 के लिए काश्तकारों से शिकमी (बटाई या खोट) पर जमीन लेकर धान की बुवाई की है। वे पिछले कई दिनों से सेवा सहकारी समितियों और ऑनलाइन सेंटरों के चक्कर काट रहे हैं] लेकिन पोर्टल चालू न होने या तकनीकी समस्या के कारण शिकमी पर ली गई जमीन का पंजीयन नहीं हो पा रहा है।
10 अक्टूबर है अंतिम तिथि, तारीख बढ़ाने की मांग
धान उपार्जन पंजीयन की अंतिम तिथि 10 अक्टूबर तय की गई है। किसानों का कहना है कि यदि समय पर पंजीयन नहीं हुआ तो वे अपनी उपज समर्थन मूल्य पर नहीं बेच पाएंगे और उन्हें व्यापारियों को कम दाम में फसल बेचकर भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। किसानों ने मांग की है कि शिकमी पोर्टल को तुरंत चालू कराया जाए और पंजीयन की अंतिम तिथि को आगे बढ़ाया जाए, ताकि कोई भी किसान पंजीयन कराने से वंचित न रहे।

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