
सीहोर। सावन के अंतिम सोमवार पर जहां एक ओर बड़े-बड़े आयोजनों की धूम रही, वहीं ग्राम हीरापुर और चंदेरी में आस्था, माटी की खुशबू और पुरातन परंपरा का एक अलौकिक दृश्य देखने को मिला। आधुनिक चकाचौंध से दूर स्थानीय किसानों ने अपनी समृद्ध ग्रामीण संस्कृति को जीवंत रखते हुए एक अनोखी देसी कांवड़ यात्रा निकाली।
पारंपरिक तरीके से बांस की लकड़ी, सुतली की रस्सी और मिट्टी के मटकों से सजाई गई इस कांवड़ में कुलसी नदी का पवित्र जल भरकर किसान पैदल शिव मंदिर पहुंचे और भगवान भोलेनाथ का भावपूर्ण जलाभिषेक किया।
सादगी ने जीता सबका दिल
इस देसी कांवड़ यात्रा की सबसे खास बात इसकी सादगी और परंपरा के प्रति किसानों का गहरा लगाव रहा। किसी भी तरह के आधुनिक साधनों या दिखावे का उपयोग न करते हुए किसानों ने अपने हाथों से मिट्टी के मटके और बांस की लकड़ी से पारंपरिक कांवड़ तैयार की। कुंलासी नदी के तट पर पहुंचकर विधिवत पूजन-अर्चन के बाद मटकों में जल भरा गया। रास्ते भर किसान भोलेनाथ के जयकारे लगाते हुए और अपनी माटी से जुड़ाव का संदेश देते हुए आगे बढ़े।
अच्छी बारिश और लहलहाती फसलों की कामना
किसान एवं समाजसेवी एमएस मेवाड़ा ने बताया कि अन्नदाता का भगवान शिव के साथ अटूट रिश्ता है। मंदिर पहुंचकर किसानों ने भगवान आशुतोष से क्षेत्र में पर्याप्त वर्षा और गन्ना, मक्का, गेहूं, धान, सोयाबीन तथा मूंगफली की बंपर पैदावार की सामूहिक प्रार्थना की।
फसल अच्छी होगी तो थमेगी महंगाई
एमएस मेवाड़ा ने कहा कि वर्तमान समय में रक्षाबंधन का त्योहार नजदीक है और शक्कर व अन्य खाद्य सामग्रियों के दाम बढ़े हुए हैं। यदि भगवान शिव की कृपा से किसानों की फसलों की पैदावार अच्छी होगी और उत्पादन बढ़ेगा तो इससे बाजार में महंगाई को नियंत्रित करने में बड़ी मदद मिलेगी। भरपूर फसल न केवल किसान परिवार को आर्थिक संकट से उबारेगी, बल्कि आम जनता को भी महंगाई से राहत दिलाएगी।