पिता का दर्द, छात्रावास अधीक्षिका की लापरवाही से बेटी के साथ हुई त्रासदी
लाडक़ुई निवासी 8वीं की छात्रा का अपहरण और दुष्कर्म का मामला, आक्रोशित परिजनों ने कलेक्ट्रेट में सौंपा ज्ञापन, 7 दिन का दिया अल्टीमेटम

सीहोर। एक पिता के लिए इससे बड़ी विडंबना क्या होगी कि जिस सरकारी संस्थान छात्रावास के भरोसे उसने अपनी लाड़ली को पढ़ाई के लिए सौंपा, उसी की लापरवाही ने बेटी की जिंदगी में अंधेरा भर दिया। जिले के आदिम जाति बालिका छात्रावास में सुरक्षा व्यवस्था और नियमों की धज्जियां उड़ाने वाला एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां अधीक्षिका की घोर लापरवाही के कारण 8वीं की छात्रा को अपहरण और दुष्कर्म जैसी भयानक त्रासदी झेलनी पड़ी।
ग्राम भिलाई निवासी पीडि़ता के पिता ने भारी मन से कलेक्ट्रेट में अपनी व्यथा सुनाई। उन्होंने बताया कि छात्रावास अधीक्षिका ज्योति दुबे ने सुरक्षा नियमों को ताक पर रखकर उनकी नाबालिग बेटी को परिवार की सहमति के बिना एक अनजान व्यक्ति के साथ जाने दिया। इसी बड़ी चूक का फायदा उठाकर आरोपी ने छात्रा का अपहरण किया और उसके साथ घिनौनी वारदात को अंजाम दिया। पिता का आरोप है कि यदि अधीक्षिका बाल सुरक्षा नियमों का पालन करतीं तो उनकी बेटी आज सुरक्षित होती।
भ्रष्टाचार और लापरवाही का आरोप
शिकायत में न केवल सुरक्षा, बल्कि प्रशासनिक अनियमितताओं की पोल भी खोली गई है। ज्ञापन में बताया कि अधीक्षिका मूलत: स्कूल शिक्षा विभाग की कर्मचारी हैं, जो लंबे समय से नियम विरुद्ध तरीके से आदिम जाति कल्याण विभाग में प्रतिनियुक्ति पर जमी हुई हैं। अधीक्षिका को नियमों को ठेंगा दिखाते हुए दो अलग-अलग छात्रावासों का प्रभार दे दिया गया है, जिनके बीच की दूरी 40 किलोमीटर है। नियमानुसार अधीक्षक का 24 घंटे छात्रावास में रहना अनिवार्य है, लेकिन दोहरे प्रभार के चक्कर में वे नदारद रहती हैं, जिससे छात्राओं की सुरक्षा भगवान भरोसे है।
न्याय नहीं मिला तो होगा उग्र आंदोलन
पीडि़ता परिवार और ग्रामीणों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है। उन्होंने कलेक्टर से मांग की है कि दोषी कर्मचारी को तत्काल प्रतिनियुक्ति से हटाकर उन पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए। यदि 5 से 7 दिनों के भीतर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो समस्त ग्रामवासी कलेक्ट्रेट का घेराव करेंगे और उग्र आंदोलन के लिए विवश होंगे।



