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सीएम हाउस में मोहन-शिवराज की बैठक का असर, विधायक रमाकांत भार्गव के समझाने पर माने आदिवासी, पदयात्रा खत्म कर बसों से लौटे कोसमी

सीहोर। भैरुंदा के कोसमी गांव के आदिवासियों का गुस्सा आखिरकार शांत हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बीच सीएम हाउस में हुई अहम मंत्रणा के तुरंत बाद विधायक रमाकांत भार्गव ने मोर्चा संभाला। विधायक के समझाने के बाद भोपाल की ओर पैदल आ रहे आदिवासी ग्रामीण अपनी पदयात्रा समाप्त कर बसों से वापस अपने गांव लौट गए हैं।
बता दें भैरूंदा तहसील के ग्राम कोसमी में वन विभाग की कार्रवाई के खिलाफ आदिवासी समाज ने उग्र विरोध का रास्ता अपनाया था। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए गुरुवार की देर शाम मुख्यमंत्री निवास पर एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई गई। इस बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ-साथ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और आदिवासी वित्त विकास निगम की अध्यक्ष निर्मला बरेला, निगम अध्यक्ष रवि मालवीय, रघुनाथ सिंह भाटी भी मौजूद थीं। बैठक में प्रभावित आदिवासी परिवारों के 16 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने अपनी बात रखी, जिसके बाद सरकार ने उनकी समस्याओं का तुरंत समाधान करने का बड़ा फैसला लिया।

विधायक रमाकांत भार्गव ने संभाला मोर्चा
मुख्यमंत्री निवास पर बैठक और सहमति बनने के तुरंत बाद बुधनी विधायक रमाकांत भार्गव बिना देर किए सीधे आंदोलनरत आदिवासियों के बीच जा पहुंचे। उनके साथ कलेक्टर बालागुरु के और एसपी जैसे आला अधिकारी भी मौजूद थे। विधायक रमाकांत भार्गव ने ग्रामीणों के बीच पहुंचकर बड़े अपनेपन के साथ उन्हें सरकार के फैसलों और आश्वासनों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि सरकार उनके साथ पूरी तरह खड़ी है। विधायक की अपील और समझाइश का असर तुरंत देखने को मिला और आंदोलनरत ग्रामीण मान गए। इसके बाद सभी ग्रामीण पदयात्रा रोककर बसों में सवार हुए और कोसमी के लिए रवाना हो गए।
सरकार ने मानी कौन-कौन सी मांगें
बीजेपी सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया है कि प्रभावित आदिवासी परिवारों को सिंहपुर गांव में जमीन के पट्टे दिए जाएंगे, ताकि वे अपना पक्का आशियाना बना सकें। कोसमी गांव में वन विकास निगम के जिन अधिकारियों ने तोडफ़ोड़ की कार्रवाई की थी, उसकी उच्चस्तरीय जांच करवाई जाएगी।

क्यों भडक़ा था आदिवासियों का आक्रोश
यह पूरा विवाद 11 अक्टूबर को तब शुरू हुआ था, जब कोसमी गांव में वन विकास निगम ने अतिक्रमण हटाने के नाम पर कार्रवाई की थी। इस दौरान 12 आदिवासी परिवारों के मकान तोड़ दिए गए थे, जिससे उनके सामने रहने का गंभीर संकट खड़ा हो गया था। ग्रामीणों का यह भी आरोप था कि घर तोडऩे के साथ उनके पीने के पानी के कुओं को भी पाट दिया गया, जिससे उनका जीना मुहाल हो गया था।
80 किमी तक निकाली जा रही थी पदयात्रा
अपने अधिकारों और न्याय की मांग के लिए गुरुवार सुबह 11 बजे कोसमी से करीब 2 हजार से अधिक आदिवासी महिला, पुरुष, युवा और बच्चे भोपाल की ओर पैदल मार्च पर निकल पड़े थे। कड़ाके की धूप और 80 किलोमीटर से ज्यादा के लंबे रास्ते की परवाह किए बिना यह डेढ़ किलोमीटर लंबी रैली राजधानी की तरफ बढ़ रही थी। लेकिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बीच हुई मंत्रण के बाद यह बड़ा आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त हो गया।

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