
सीहोर। अपनों को खोने का गम जिंदगी भर इंसान को कचोटता रहता है, लेकिन सीहोर के एक परिवार ने इस गहरे दुख को समाज सेवा और मानवता की अनूठी मिसाल में बदल दिया है। शहर के हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी निवासी मनीष दुबे के साढ़े तीन साल के मासूम बेटे का कुछ समय पहले एक हादसे में देहांत हो गया था। बेटे की याद को अमर बनाने और दूसरों की जिंदगी बचाने के लिए परिजनों ने हर वर्ष रक्तदान करने का अनुकरणीय निर्णय लिया है। इसी संकल्प को सार्थक करते हुए बुधवार को जिला अस्पताल स्थित ब्लड बैंक पहुंचकर परिजनों और उनके परिचितों ने 14 यूनिट रक्तदान किया।
मासूम के पिता मनीष दुबे ने भावुक होते हुए बताया कि वर्ष 2021 में उनका साढ़े तीन साल का बेटा छत से गिर गया था। इस आकस्मिक हादसे में उन्होंने अपने लाडले को हमेशा के लिए खो दिया। इस असहनीय दुख से उबरने के बाद परिवार ने तय किया कि वे अपने बच्चे की याद में आंसू बहाने के बजाय दूसरों की जिंदगी बचाएंगे। इसी उद्देश्य के साथ उन्होंने हर साल बच्चे की पुण्यतिथि पर रक्तदान करने और जरूरतमंदों की सेवा करने का संकल्प लिया।
लगातार दूसरे वर्ष भी जारी रहा सेवा का संकल्प
इस पुनीत संकल्प के तहत लगातार दूसरे वर्ष भी जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इस मुहिम में केवल परिवार के सदस्य ही नहीं, बल्कि उनके दोस्त, रिश्तेदार और कई परिचित भी शामिल हुए। सभी ने स्वेच्छा से आगे आकर जरूरतमंद मरीजों के लिए 14 यूनिट खून डोनेट किया। अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ ने भी परिवार की इस अनूठी और मानवीय पहल की जमकर सराहना की।
रक्तदान जीवन बचाने का सबसे बड़ा जरिया
मनीष दुबे ने कहा कि रक्तदान किसी भी इंसान को नया जीवन देने का सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र तरीका है। अस्पतालों में कई बार खून की कमी के कारण मरीजों की जान जोखिम में पड़ जाती है, ऐसे समय में यह रक्त उनके लिए जीवनदायिनी साबित होगा। यह शिविर एक ऐसी सामाजिक पहल है जो लोगों को एक-दूसरे की मदद करने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित करती है।
अगले वर्ष और बड़े स्तर पर होगा आयोजन
बच्चे के पिता ने बताया कि उनका यह सेवा का क्रम आगे भी जीवनभर जारी रहेगा। उन्होंने संकल्प जताया है कि अगले वर्ष इस कार्यक्रम में और अधिक संख्या में युवाओं और आम नागरिकों को जोडऩे का प्रयास किया जाएगा। इसके साथ ही वे जिले भर में रक्तदान को लेकर जागरूकता अभियान भी चलाएंगे ताकि कोई भी मरीज रक्त के अभाव में दम न तोड़े।