
सीहोर। सीहोर-इछावर मार्ग पर बीती देर रात एक ऐसा हादसा हुआ जिसने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी। यहां दो पुलिया जोड़ के पास एक तेज रफ्तार एंबुलेंस और ट्रक के बीच जबरदस्त भिड़ंत हो गई। विडंबना देखिए कि जिस एंबुलेंस का काम लोगों की जान बचाना है, उसी का चालक हादसे के बाद एक घंटे तक दूसरी एंबुलेंस का इंतजार करता रहा, लेकिन कोई मदद नहीं पहुंची।
बता दें टक्कर इतनी भीषण थी कि एंबुलेंस का अगला हिस्सा मलबे में तब्दील हो गया और चालक केबिन के भीतर ही बुरी तरह फंस गया। मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने मानवता दिखाते हुए तुरंत मोर्चा संभाला। काफी मशक्कत के बाद क्षतिग्रस्त केबिन को औजारों से काटकर घायल चालक को बाहर निकाला गया। चालक के पैरों और शरीर में गंभीर चोटें आई हैं।
एक घंटे का लंबा इंतजार
हादसे के तुरंत बाद ग्रामीणों ने घायल चालक को अस्पताल भेजने के लिए सरकारी एंबुलेंस सेवा को फोन किया। ग्रामीणों का आरोप है कि करीब एक घंटे तक मौके पर कोई भी एंबुलेंस नहीं पहुंची। गंभीर रूप से घायल चालक सडक़ पर तड़पता रहा।
खाली एंबुलेंस पर उठे सवाल
हादसे के बाद ग्रामीणों ने एंबुलेंस संचालकों की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है था कि अक्सर एंबुलेंस चालक बिना किसी मरीज के भी हाईवे पर बेवजह तेज सायरन बजाते हुए गाडिय़ां दौड़ाते हैं। सरकारी एंबुलेंस का उपयोग कथित तौर पर निजी कार्यों के लिए किया जा रहा है। यही कारण है कि जब वास्तव में किसी की जान पर बन आती है तो एंबुलेंस समय पर उपलब्ध नहीं होती।
पुलिस ने शुरू की जांच
इछावर थाना प्रभारी पंकज वाडेकर ने बताया कि पुलिस इस मामले की गहनता से जांच कर रही है। दुर्घटना का प्राथमिक कारण तेज रफ्तार और लापरवाही माना जा रहा है। पुलिस अब इस बिंदु पर विशेष फोकस कर रही है कि हादसे के वक्त एंबुलेंस में कोई मरीज था या नियमों का उल्लंघन हो रहा था।