राशन न मिलने पर भडक़े झरखेड़ा के ग्रामीण, अंगूठा लगवाकर राशन डकारने का आरोप, एसडीएम से शिकायत

सीहोर। इछावर तहसील अंतर्गत ग्राम झरखेड़ा में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत बांटे जाने वाले राशन में भारी गड़बड़ी और कालाबाजारी का मामला सामने आया है। गांव के दर्जनों ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट/एसडीएम कार्यालय पहुंचकर उचित मूल्य दुकान संचालक के खिलाफ मोर्चा खोला और अनुविभागीय अधिकारी को एक लिखित शिकायत सौंपी।
ग्रामीणों ने विंध्याचल स्व.सहायता समूह ललियाखेड़ी द्वारा संचालित उचित मूल्य दुकान के जिम्मेदारों पर गंभीर आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
अंगूठा लगवाया पर नहीं दिया अनाज
शिकायत लेकर पहुंचे ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले छह महीनों से उन्हें नियमित रूप से खाद्यान्न का वितरण नहीं किया जा रहा है। राशन दुकान के संचालक गरीब, असहाय और अनपढ़ उपभोक्ताओं के घरों पर जाकर बायोमेट्रिक मशीन पर उनका अंगूठा लगवा लेते हैं। अंगूठा लगते ही सर्वर पर पात्रता पर्ची के आधार पर राशन का उठान (इश्यू) दर्ज हो जाता है, लेकिन इसके बाद उपभोक्ताओं को उनका हक यानी खाद्यान्न नहीं सौंपा जाता।
नियमित नहीं खुलती दुकान
ग्रामीणों ने शिकायत में कहा कि उचित मूल्य की दुकान नियमित समय पर नहीं खोली जाती है। जब भी पात्र हितग्राही राशन लेने पहुंचते हैं तो दुकान बंद मिलती है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि गरीबों के हक के राशन की कालाबाजारी की जा रही है और इसमें भारी वित्तीय अनियमितताएं शामिल हैं। महीनों से राशन न मिलने के कारण गांव के गरीब परिवारों के सामने रोजी-रोटी और भरण-पोषण का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
ग्रामीणों ने दिए दो विकल्प
समस्या के स्थाई समाधान और राहत के लिए ग्रामीणों ने एसडीएम के समक्ष दो प्रमुख मांगें रखी हैं, जिनमें झरखेड़ा में महीने में कम से कम एक निश्चित दिन दुकान खोलकर राशन का वितरण कराया जाए। यदि वर्तमान समूह से वितरण संभव न हो तो ग्रामीणों को आर्या उचित मूल्य दुकान से राशन लेने के लिए संबद्ध टैग किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि इन विकल्पों से पात्र परिवारों को समय पर राशन मिल सकेगा और उन्हें बार-बार भटकना नहीं पड़ेगा।
जांच के बाद होगी कार्रवाई
ग्रामीणों ने एसडीएम से गुहार लगाई है कि पूरे मामले की मौके पर जाकर जांच कराई जाए और बायोमेट्रिक रिकॉर्ड व स्टॉक का मिलान किया जाए। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित स्व. सहायता समूह और जिम्मेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाए।



