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5 साल की उम्र में घर छोड़ा, श्रीरूद्रधाम सहित 7 आश्रमों की स्थापना की, अब हो गए ब्रम्हलीन

- क्षेत्र में शोक की लहर, रमगढ़ा स्थित श्रद्रधाम आश्रम में दी गई वैदिक रीति से समाधि

सीहोर। जिले के प्रसिद्ध तीर्थ स्थान रमगढ़ा स्थित रूद्रधाम आश्रम के संस्थापक एवं छोटे गुरूजी के नाम से प्रसिद्ध संत 108 श्रीबजरंगगिरी जी महाराज ने भी अपनी देह त्याग दी। उनको रूद्रधाम आश्रम में ही वैदिक रीति-रिवाज के साथ संत-महात्मा, ब्राह्म्णों की उपस्थिति में समाधि दी गई। उनके निधन की खबर से क्षेत्र में शोक की लहर फेल गई एवं हर आंखें नम हो गईं। इससे पहले 30 अगस्त को रमगढ़ा के बड़े गुरूजी श्रीपरमहंसजी महाराज ने भी अपनी देह त्यागी थी। उनको मरदानपुर स्थित आश्रम में समाधि दी गई। अब 28 सितंबर को रमगढ़ा स्थित रूद्रधाम आश्रम में विशाल भंडारा कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
5 साल की उम्र में छोड़ दिया था घर-
बजरंगगिरी जी महाराज ने 5 साल की उम्र में ही घर छोड़ दिया था। इसके बाद उन्होंने गुजरात के कच्छ, सीहोर जिले के रमगढ़ा, पांगरा, मरदानपुर, रायसेन जिले के बिसेर, शाजापुर जिले के शुजालपुर एवं नरसिंहपुर के बरमान घाट के पास अलग-अलग 7 आश्रमों की स्थापना की। रायसेन जिले के बिसेर में आश्रम अभी निर्माणाधीन है। इसका नाम उन्होंने अवंतिका धाम रखा था। यहां पर 12 ज्योर्तिंलिंगों का निर्माण किया जा रहा है। रमगढ़ा स्थित रूद्रधाम आश्रम की स्थापना वर्ष 2000 के दौरान हुई। इसके बाद से यहां पर लगातार हर वर्ष नवकुंडात्मक महायज्ञ एवं कथाएं होती हैं। इससे पहले वर्ष 1998-99 के दौरान श्रीबजरंगगिरीजी महाराज रमगढ़ा आए थे और उन्होंने यहां पर पहली बार लक्ष्मी नारायण यज्ञ किया था। इसके बाद लोगों के आग्रह पर वह यहीं पर रुक गए एवं रूद्रधाम आश्रम की स्थापना की। श्रीरूद्रधाम आश्रम से क्षेत्र की पहचान बढ़ी। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु रूद्रधाम आश्रम में दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यह स्थान पवित्र कोलार नदी के किनारे इंदौर-भोपाल-होशंगाबाद रोड पर बना हुआ है।
13 दिनों में गुरू-शिष्य दोनों हुए ब्रम्हलीन-
श्रीरूद्रधाम आश्रम की स्थापना बजरंगगिरीजी महाराज ने की थी। बताया जाता है कि वे बड़े गुरूजी परमानंदजी महाराज के शिष्य थे। उन्होंने 5 वर्ष की उम्र में ही घर छोड़ दिया था। कहां से आए थे इसका जिक्र कभी नहीं किया। इससे पहले 30 अगस्त को परमानंदजी महाराज ने भी शरीर त्याग दिया था। उनका भंडारा कार्यक्रम 15 सितंबर को तय हुआ था, लेकिन अब बजरंगगिरीजी महाराज ने भी देह त्याग दी। श्रीरूद्रधाम आश्रम के कार्यक्रम संचालन समिति के सचिव सीताराम जाट ने बताया कि 15 सितंबर का भंडारा कार्यक्रम निरस्त करके अब 28 सितंबर को विशाल भंडारा कार्यक्रम तय किया गया है। समिति के मीडिया प्रभारी दिलीप सिंह ठाकुर ने बताया कि 13 दिनों में दोनों गुरूजी का ब्रम्हलीन होना हम सबके लिए दुख की बात है। उनके जाने से आश्रम में खालीपन हो गया। श्रीबजरंगगिरीजी महाराज ने शनिवार रात्रि को करीब 11.45 बजे अपना शरीर त्याग दिया था। वे दो-चार से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन का समाचार क्षेत्र में फैलते ही उनके शिष्य एवं आसपास के क्षेत्र के हजारों लोग आश्रम में एकत्रित हो गए।
अंतिम दर्शन करने उमड़ा आस्था का सैलाब-
श्रीबजरंगगिरीजी महाराज के अंतिम दर्शन के लिए क्षेत्र के हजारों लोग रूद्रधाम आश्रम पहुंचे। इस दौरान बुधनी विधायक रमाकांत भार्गव, युवा नेता कार्तिकेय सिंह चौहान, वरिष्ठ भाजपा नेता गुरुप्रसाद शर्मा, पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह राजपूत, मप्र पिछड़ा वर्ग-अल्पसंख्यक विकास निगम के अध्यक्ष रवि मालवीय, पूर्व विधायक देवेंद्र पटेल, लघु वनोपज संघ के पूर्व उपाध्यक्ष रामनारायण साहू, आसाराम यादव, अनार सिंह चौहान सहित बड़ी संख्या में आसपास के क्षेत्र के संत-महात्मा एवं आमजन मौजूद रहे। भारी भीड़ के कारण रेहटी थाना प्रभारी हिमलेंद्र सिंह पटेल के नेतृत्व में पुलिस टीम ने ट्राफिक एवं सुरक्षा व्यवस्था संभाली, जिससे सड़क जाम जैसी स्थिति नहीं बनी।

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