Newsआष्टाइछावरजावरनसरुल्लागंजबुदनीमध्य प्रदेशरेहटीसीहोर

घाटे का सौदा बनी शराब दुकानें, सीहोर में 12 दुकानों के लिए नहीं आए नए टेंडर

71 कम्पोजिट दुकानों में 12 दुकानों के लिए 47 करोड़ 24 लाख का ऑफर, विभाग ने कीमत रखी 71 करोड़ 80 लाख

सीहोर। जिले की 71 कम्पोजिट शराब दुकानों के लिए कोई भी नए टेंडर नहीं आए हैं। इन शराब दुकानों के लिए पहले से 47 करोड़ 24 लाख रूपए के ऑफर हैं, लेकिन विभाग ने इन दुकानों के लिए 71 करोड़ 80 लाख कीमत रखी है। ऐसे में इन दुकानों की अब तक नीलामी नहीं हो सकी है। शनिवार तक इन दुकानों के लिए कोई नए ऑफर नहीं आए थे। अब गेंद विभाग के पाले में है। यदि पुराने ऑफर पर दुकानें नीलाम होंगी तो इससे विभाग को चपत लगेगी। संभावनाएं हैं कि विभाग खुद ही इन दुकानों का संचालन करे। शासन स्तर पर भी निगम मंडल बनाकर दुकानें चलाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। ऐसे में इन दुकानों को लेकर अब तक संशय भी बना हुआ है।
सीहोर जिले में आबकारी विभाग ने शराब दुकानों से इस वर्ष 350 करोड़ रूपए राजस्व प्राप्ति का लक्ष्य रखा है, लेकिन अब तक यह लक्ष्य प्राप्त नहीं हो सका है। विभाग लक्ष्य से भी काफी दूर है। ऐसे में शराब की दुकानें घाटे का सौदा बनती जा रही है। दरअसल गत वर्ष 292 करोड़ रूपए का राजस्व प्राप्त किया था। इस वर्ष 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ में 350 करोड़ रूपए का लक्ष्य था, लेकिन अब तक करीब 236 करोड़ रूपए ही राजस्व प्राप्त हो सका है। अब 12 दुकानों की नीलामी का इंतजार है।
प्रमुख दुकानों की हो चुकी है नीलामी
सीहोर जिले की प्रमुख शराब दुकानों की नीलामी पहले ही हो चुकी है। इन दुकानों से राजस्व भी अच्छा प्राप्त हुआ है, लेकिन लक्ष्य के करीब नहीं पहुंच सके हैं। ऐसे में अब जो 12 दुकानें बची हैं उनसे इतना राजस्व प्राप्त होना बेहद मुश्किल है। हालांकि विभाग ने अब तक इन दुकानों को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया है। इन 12 दुकानों के लिए विभाग ने 71 करोड़ 80 लाख रूपए का लक्ष्य तय किया है, जबकि पहले जो ऑफर आए हैं वे करीब 47 करोड़ 24 लाख रूपए के आए हैं। ऐसे में अब निर्णय विभाग को लेना है।
अमले का संकट, कैसे चलेंगी दुकानें
सीहोर जिले में आबकारी विभाग के पास अमले का भी संकट है। बेहद कम कर्मचारियों के भरोसे चल रहे विभाग को यदि इन दुकानों का संचालन मिलता है तो यह मुश्किल कार्य हो जाएगा। विभाग को वर्षभर अन्य कार्यों के साथ में अवैध शराब के लिए भी कार्रवाई करनी होती है। ऐसे में दुकानों को संचालित करने में कई परेशानियां भी आएंगी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button