पटवारियों को बड़ी राहत, दर्ज नहीं होगी एफआईआर…

सीहोर। मध्य प्रदेश के पटवारियों के लिए राज्य सरकार के राजस्व विभाग से एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। शासन ने स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में किसी भी पटवारी पर सीधे एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। वहीं दूसरी ओर रेहटी तहसील में अपनी 5 सूत्रीय मांगों को लेकर पटवारियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है, जिससे राजस्व कार्य ठप होने लगे हैं।
राजस्व न्यायालयों में प्रस्तुत किए गए प्रतिवेदनों के आधार पर यदि किसी पटवारी के खिलाफ एफआईआर का मामला बनता भी है तो पहले उसकी प्रारंभिक जांच कराई जाएगी। जांच में दोष सिद्ध होने पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई होगी।
बता दें मध्य प्रदेश पटवारी संघ ने 20 जुलाई को शासन को ज्ञापन सौंपा था। संघ का तर्क था कि वसीयत या अन्य अदालती मामलों में पटवारी केवल अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करता है, जिस पर अंतिम निर्णय न्यायालय लेता है। इसके बावजूद कई मामलों में बिना गहन जांच के पटवारी पर सीधे पुलिस केस दर्ज कर दिया जाता था। इस शिकायत पर संज्ञान लेते हुए राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. ई. रमेश कुमार ने 3 अगस्त को प्रदेश के सभी कलेक्टर्स को कड़े निर्देश जारी किए हैं।
पहले जांच अनिवार्य
निर्देशों के अनुसार एफआईआर दर्ज कराने से पहले अनिवार्य रूप से प्रारंभिक परीक्षण किया जाएगा। प्रदेश के सभी जिलों के कलेक्टर्स को आदेश का सख्ती से पालन करने के निर्देश। सभी संभागायुक्तों को भी प्रतिलिपि भेजकर सूचित किया गया। झूठी और जल्दबाजी में होने वाली पुलिस कार्रवाई से हजारों पटवारियों को राहत मिलेगी।
रेहटी में पटवारी संघ की अनिश्चितकालीन हड़ताल
एक तरफ जहां शासन के आदेश से राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर समस्याओं को लेकर पटवारी लामबंद हो गए हैं। मध्य प्रदेश पटवारी संघ रेहटी इकाई ने अपनी 5 सूत्रीय मांगों को लेकर सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा कर दी है।
पटवारी संघ के प्रवक्ता हर्षवर्धन परमार ने बताया कि वे बीते एक साल से प्रशासन के समक्ष अपनी मांगें रख रहे हैं। मांगे न पूरी होने पर संघ ने 28 जुलाई से सांकेतिक काम बंद किया था और अब पूर्ण हड़ताल पर चले गए हैं। संघ ने तहसीलदार सपना झिल्लोरिया को ज्ञापन सौंपा है।
पटवारियों की 5 प्रमुख मांगें
– वेतन विसंगति का निराकरण।
– पदोन्नति एवं सेवा संबंधी समस्याओं का हल।
– कार्य के अनुरूप आवश्यक सुविधाएं और संसाधन।
– लंबित भत्तों एवं देयकों का तुरंत भुगतान।
– संघ की अन्य न्यायोचित मांगों का शीघ्र समाधान।
हड़ताल से आमजन और किसान परेशान
हड़ताल के कारण तहसील कार्यालयों में कामकाज पूरी तरह प्रभावित हुआ है। इसका सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ रहा है। खसरा-खतौनी की नकल, नामांतरण और सीमांकन जैसे जरूरी कामों के लिए किसान तहसील के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

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