केन्द्रीय मंत्री के कानों तक पहुंची भाजपा की अंदरुनी खींचतान…

सीहोर। भारतीय जनता पार्टी के गढ़ माने जाने वाले सीहोर जिले में पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी और खींचतान अब निकलकर केंद्रीय नेतृत्व के कानों तक पहुंच गई है। बीते दिनों इछावर दौरे पर आए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से भाजपा नेताओं ने संगठन और प्रशासनिक स्तर पर आ रही समस्याओं व उपेक्षा की शिकायत दर्ज कराई है। अंदरखाने से खबर है कि इछावर क्षेत्र में लगातार सामने आ रहे असंतोष को लेकर केंद्रीय मंत्री ने सख्त नाराजगी व्यक्त की है।
बता दें सीहोर जिला भाजपा में चल रहा असंतोष अब पूरी तरह खुलकर सामने आ गया है। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में जिला भाजपा अध्यक्ष नरेश मेवाड़ा की इछावर की राजनीति में लगातार आयोजनों से हो रही उपेक्षा है। शासकीय कार्यक्रमों के आमंत्रण पत्रों और लोकार्पण पट्टिकाओं से जिलाध्यक्ष का नाम गायब होने से सियासी गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
निमंत्रण पत्र से गायब हुआ जिलाध्यक्ष का नाम
बता दें हाल ही में इछावर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम बोरदी कलां में प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना-4 के तहत स्वीकृत 36 मार्गों के भूमिपूजन कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस शासकीय कार्यक्रम के जारी आधिकारिक आमंत्रण पत्र में सत्तारूढ़ दल के जिलाध्यक्ष नरेश मेवाड़ा का नाम शामिल ही नहीं किया गया।
हैरानी की बात यह है कि इस बड़े आयोजन के कार्ड में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, राज्य के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल, राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा, प्रभारी मंत्री कृष्णा गौर, जिला पंचायत अध्यक्ष रचना सुरेंद्र मेवाड़ा और जनपद अध्यक्षों के नाम प्रमुखता से दर्ज थे, लेकिन भाजपा के ही जिलाध्यक्ष का नाम कार्ड से नदारद रहने से प्रशासनिक व राजनीतिक कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।
24 सितंबर को मंच पर छलका था दर्द
सरकारी कार्यक्रमों में जिलाध्यक्ष की उपेक्षा का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले 24 सितंबर को ग्राम ढाबला केलवाड़ी में 2.32 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 33/11 केवी विद्युत उपकेंद्र के लोकार्पण समारोह में भी ऐसा ही वाकया देखने को मिला था। लोकार्पण पट्टिका पर नाम न होने और आधिकारिक सूचना न मिलने से व्यथित जिलाध्यक्ष नरेश मेवाड़ा मंच पर ही अपने दर्द को रोक नहीं पाए। उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी उपेक्षा पर दुख व्यक्त करते हुए कहा था कि वे स्वयं पास के बिलकिसगंज के मूल निवासी हैं और जिस ढाबला केलवाड़ी में उपकेंद्र बना है, वहां उनकी मौसी का घर है। इसके बावजूद उन्हें इतने महत्वपूर्ण शासकीय आयोजन की न तो कोई आधिकारिक जानकारी दी गई और न ही शिलालेख पर नाम दिया गया। मेवाड़ा ने मंच से स्पष्ट किया था कि वे किसी शासकीय निमंत्रण पर नहीं, बल्कि क्षेत्रीय विधायक व राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा के व्यक्तिगत फोन कॉल पर सम्मान रखते हुए वहां पहुंचे थे।
पहले शामिल रहता था नाम, अब क्यों बनाई दूरी
सियासी गलियारों की चर्चाओं के अनुसार इससे पहले जिले में होने वाले तमाम बड़े-छोटे शासकीय आयोजनों और उनके निमंत्रण कार्डों में जिलाध्यक्ष नरेश मेवाड़ा का नाम सम्मानपूर्वक शामिल रहता था, लेकिन अचानक केवल इछावर की राजनीति में पिछले कुछ आयोजनों में जिस तरह से निमंत्रण कार्ड से लेकर शिलालेखों तक से उनका नाम गायब किया गया है, उससे यह साफ झलकता है कि जिले में राजनीतिक खींचतान चरम पर है।
अब देखना यह होगा कि केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान तक मामला पहुंचने और उनकी नाराजगी के बाद जिले के इस अंदरूनी असंतोष पर क्या विराम लगता है या फिर यह खींचतान आने वाले दिनों में किसी नए मोड़ पर पहुंचेगी।



