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सीहोर जिले में मिट्टी-बजरी की एक भी खदान स्वीकृत नहीं, फिर भी हर दिन निकल रही हजारों डंपर अवैध मिट्टी

- खनिज विभाग की मिलीभगत से हो रहा जमकर अवैध मिट्टी और बजरी का काला कारोबार

सुमित शर्मा, सीहोर
सीहोर जिलेभर में मिट्टी और बजरी की एक भी खदान स्वीकृत नहीं है, लेकिन इसके बाद भी हर दिन हजारों डंपर अवैध मिट्टी और बजरी खोदी जा रही है। यह अवैध मिट्टी और बजरी का काला कारोबार खनिज विभाग के जिम्मेदारों की मिलीभगत से हो रहा है। खास बात तो यह है कि सीहोर जिले के बुधनी से इंदौर के बीच में नई रेलवे लाइन भी डाली जा रही है। इस रेलवे लाइन के लिए भी खनिज विभाग ने कई जगह से मिट्टी खोदने की अनुमति दे दी, जबकि खनिज विभाग द्वारा लिखित दस्तावेज में साफ है कि सीहोर जिले में मिट्टी की खदानें (उत्खनिपट्टा) एवं बजरी की खदानें स्वीकृत नहीं है। जब मिट्टी और बजरी की खदानें ही स्वीकृत नहीं हैं तो फिर इतनी बड़ी मात्रा में मिट्टी खोदने की अनुमति कैसे दे दी गई।
सीहोर जिलें में जिस तरह से अवैध उत्खनन किया जा रहा है वह पर्यावरण की दृष्टि से बेहद गंभीर है। एक तरफ सरकार लगातार पर्यावरण को संरक्षित रखने की दिशा में कदम बढ़ा रही है तो वहीं सीहोर जिले में जमकर पर्यावरण को नष्ट करने के कारनामें किए जा रहे हैं। पर्यावरण को संरक्षित रखने के लिए जल, भूमि, वनों को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है, लेकिन सीहोर जिले में खनिज विभाग के जिम्मेदारों की मिलीभगत से जमकर जमीनें खोदी जा रही हैं, जो पर्यावरण के लिए बेहद खतरनाक साबित होगा। जिलेभर में अवैध मिट्टी और बजरी का काला कारोबार किया जा रहा है, लेकिन जिले के खनिज विभाग ने आंखें बंद करके ये अवैध कार्यों को करने की खुली छूट दे दी है।
रेलवे लाइन के लिए खोद डाले तालाब –

जिलेभर में वैध मिट्टी की खदानें नहीं होने के बावजूद भी रेलवे लाइन के लिए हजारों डंपर मिट्टी तालाबों से खुदवा दी। यह मिट्टी स्थानीय ग्राम पंचायतों के सरपंच और सचिवों ने रेलवे ठेकेदारों के साथ सांठ-गांठ करके खुदवाई है। इस खेल में खनिज विभाग के जिम्मेदार भी बराबरी के हकदार हैं। खनिज विभाग ने तो एक कारनामा ऐसा भी कर दिया कि पहले तो एक ग्राम पंचायत के तालाब को मिट्टी निकालकर कुआं बना दिया गया और जब तालाब पूरी तरह से खुद गया तो उसकी अनुमति भी जारी कर दी। कई सरपंचों ने लाखों रूपए रेलवे ठेकेदारों से ले लिए और उन्हें गांव के तालाबों को खोदने की खुली छूट दे दी। इन तालाबों में जिले की ग्राम पंचायत मांजरकुई, ककरदा, पानगुराड़ियां सहित कई अन्य ग्राम पंचायतों के तालाब भी हैं।
रेत की खदानें स्वीकृत, लेकिन अवैध भी हो रहा उत्खनन-
जिलेभर में रेत की खदानें तो करीब 30 स्वीकृत हैं। इनमें से 11 रेत की खदानें बुधनी तहसील में स्वीकृत हैं तो वहीं 9 खदानें रेहटी तहसील और 10 खदानें भैरूंदा तहसील में स्वीकृत है। हालांकि इन वैध खदानों के अलावा कई खदानें अवैध रूप से भी संचालित की जा रही हैं, जिनसे भी बड़ी मात्रा में रेत निकाली जाती है। इन अवैध खदानों पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ खनिज विभाग की भी मिलीभगत है।
खनिज विभाग गहरी नींद में सोया-
एक तरफ जिलेभर में जमकर मिट्टी और बजरी का अवैध उत्खनन किया जा रहा है तो वहीं जिले का खनिज विभाग गहरी नींद में सोया है। रेलवे लाइन के लिए जमकर अवैध मिट्टी खोदी जा रही है, लेकिन खनिज विभाग ने अवैध उत्खनन पर कोई कार्रवाई नहीं की। जिले के खनिज अधिकारी धर्मेंद्र चैहान का तलादला होने के बाद अब यहां पर नए खनिज अधिकारी राजकुमार बराठे ने अपनी आमद दी है। उम्मीद की जा रही है कि वे अवैध मिट्टी और बजरी के कारोबार पर रोक लगाएंगे। इससे पहले यहां पर खनिज इंस्पेक्टर खुशबू वर्मा प्रभारी खनिज अधिकारी के रूप में कार्यभार संभाले हुए थीं। उनसे संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने कोई जबाव नहीं दिया।

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