
सीहोर। जिले में कोसमी कांड के बाद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के एक कथित बयान पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए नरपिशाच शब्द से आहत होकर वन विभाग के कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। इसी के चलते मध्य प्रदेश वन कर्मचारी संघ और वन एवं वन्य प्राणी संरक्षण कर्मचारी संघ के सैकड़ों वनकर्मियों ने कलेक्टोरेट पहुंचकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम एक ज्ञापन सौंपा। संघ ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मांग की है कि वह अपने इस बयान पर स्थिति स्पष्ट करें या फिर सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगें।
बता दें बीते दिनों बुधनी विधानसभा क्षेत्र के कोसमी इलाके में वन विकास निगम द्वारा अवैध अतिक्रमण हटाने की एक बड़ी कार्रवाई की गई थी। इस कार्रवाई के बाद केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के कथित तौर पर नरपिशाच शब्द का उपयोग किए जाने से वनकर्मी बेहद नाराज हैं।
संघ के जिलाध्यक्ष जयकुमार सक्सेना के नेतृत्व में तहसीलदार डॉ. अमित सिंह को सौंपे गए ज्ञापन में वनकर्मियों ने कड़ी आपत्ति जताई है। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि वे शासन के वैधानिक दायित्वों का पालन करते हुए वनों और वनभूमि की सुरक्षा के लिए दिन-रात काम करते हैं, लेकिन इस तरह की अमर्यादित शब्दावली का इस्तेमाल किए जाने से मैदानी कर्मचारियों का मनोबल टूटता है।
वन कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
– संघ ने मांग की है कि केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान यह स्पष्ट करें कि नरपिशाच शब्द का प्रयोग किस संदर्भ में और किनके लिए किया गया था। यदि यह शब्द वन विभाग के अधिकारियों या कर्मचारियों के लिए कहा गया है तो केंद्रीय मंत्री इस पर अपना रुख स्पष्ट करें या फिर बयान वापस लेते हुए सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त कर क्षमा मांगें।
– वनकर्मियों का कहना है कि अतिक्रमण हटाने जैसी कठिन कार्रवाई के दौरान उन्हें राजनीतिक दबावए विरोध और सुरक्षा संबंधी भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। भविष्य में ऐसी कार्रवाइयों के लिए पर्याप्त पुलिस बल और प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराया जाए।
– अवैध अतिक्रमणकारियों द्वारा राजनीतिक संरक्षण प्राप्त करने के लिए जनप्रतिनिधियों को भ्रमित करने के मामलों की निष्पक्ष जांच कराए जाने की भी मांग की गई है, ताकि वनकर्मी बिना किसी भय या दबाव के अपने कर्तव्य का पालन कर सकें।
ज्ञापन सौंपने के दौरान जिलाध्यक्ष जयकुमार सक्सेना के साथ शरद रंजन, भूपेंद्र दुगेरिया, शोएब खान, नारायण दत्त मिश्रा, संजय शर्मा, वीरेंद्र भाटी, कमलेश वर्मा, मुकेश ठाकुर, दीपेन चौहान सहित सीहोर जिले के सैकड़ों वन कर्मचारी और अधिकारी मौजूद रहे।