
सीहोर। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह क्षेत्र और वीआईपी बुधनी में स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है। बुधवार को जब एसडीएम संजीव कुमार नागू अचानक बुधनी के सिविल अस्पताल पहुंचे तो वहां की बदहाल व्यवस्थाओं की पोल खुलकर सामने आ गई। सुबह करीब 10 बजे एसडीएम ने अस्पताल का औचक निरीक्षण कर आधे घंटे तक जायजा लिया। इस दौरान ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. धनजीत बड़ोदिया समेत कई डॉक्टर और कर्मचारी अपनी ड्यूटी से नदारद मिले। अस्पताल की लापरवाही देख एसडीएम ने सख्त नाराजगी जताई, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय भाजपा और कांग्रेस नेताओं ने भी अस्पताल प्रबंधन को घेरते हुए कटघरे में खड़ा कर दिया है।
निरीक्षण के दौरान ओपीडी में महज कुछ ही डॉक्टर मरीजों का इलाज करते दिखे। कौन सा डॉक्टर कब ड्यूटी पर रहेगा, इसका ड्यूटी चार्ट तक अपडेट नहीं था। अस्पताल के कई महत्वपूर्ण कमरों पर ताले लटके पाए गए। एसडीएम ने पोषण पुनर्वास केंद्र जाकर भर्ती बच्चों के परिजनों से बात की और व्यवस्थाओं की जानकारी ली। इसके बाद महिला वार्ड में भर्ती मरीजों से इलाज और दवाओं की स्थिति जानी। जब एसडीएम निरीक्षण पूरा कर अस्पताल से बाहर निकल रहे थे, तब खबर मिलते ही बीएमओ डॉ. धनजीत बड़ोदिया आनन-फानन में पहुंचे।
एसडीएम को मिली गंदगी
एसडीएम संजीव कुमार नागू ने बताया कि अस्पताल में फैली अव्यवस्थाओं की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। ड्यूटी से गायब मिले डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को पत्र लिखा जा रहा है। एसडीएम ने अस्पताल परिसर में जमा कचरा तुरंत हटाने और परिसर में सफाई व्यवस्था दुरुस्त रखने के कड़े निर्देश दिए।
भाजपा-कांग्रेस में तकरार
वीआईपी क्षेत्र बुधनी के इस अस्पताल से मरीजों को रेफर करने पर 500 रुपये का एंबुलेंस शुल्क लेने, मर्चरी में शव रखने के लिए फ्रीजर न होने और डॉक्टरों की अनुपलब्धता को लेकर स्थानीय नेताओं में भारी आक्रोश है। भाजपा नेता सतीश गुप्ता का कहना है कि अस्पताल की अव्यवस्थाओं, मर्चरी फ्रीजर की कमी और एंबुलेंस शुल्क वसूलने की शिकायतें मिली थीं। इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों और स्थानीय विधायक को अवगत करा दिया गया है। कुछ समस्याओं का निराकरण हो चुका है और बाकी भी जल्द दूर कर ली जाएंगी।
ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष सोनू राजपूत ने अस्पताल प्रशासन पर मनमानी का सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि मरीजों को डॉक्टरों को ढूंढना पड़ता है। पूरे परिसर में गंदगी का आलम है, दवाइयां समय पर नहीं मिलतीं और एंबुलेंस जैसी बुनियादी सुविधा के लिए भी अधिकारियों व नेताओं को फोन लगाने पड़ते हैं।