
सीहोर। जिले की चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने सीहोर जिले के लिए 25 नए डॉक्टरों की पदस्थापना की है। लंबे समय बाद जिले में एक साथ इतनी बड़ी संख्या में डॉक्टरों की नियुक्ति हुई है, जिससे ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों की चिकित्सा व्यवस्था को संजीवनी मिलेगी। इस पूरी सूची में सबसे खास बात यह है कि बुधनी विधानसभा क्षेत्र को सर्वाधिक 14 नए डॉक्टर मिले हैं, जिससे क्षेत्र के अस्पतालों की सूरत पूरी तरह बदल जाएगी।
नई नियुक्तियों के तहत सबसे अधिक लाभ बुधनी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इलाकों को मिला है। बुधनी, रेहटी और नसरुल्लागंज के सिविल अस्पतालों में 3.3 डॉक्टरों की नियुक्ति की गई है। इसके अलावा क्षेत्र के विभिन्न प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को मिलाकर अकेले बुधनी विधानसभा में कुल 14 डॉक्टर तैनात किए गए हैं। नए डॉक्टरों की पदस्थापना से बुधनी और आसपास के अस्पतालों की सेवाएं अब पूरी तरह सुचारू हो सकेंगी और स्थानीय मरीजों को निजी अस्पतालों की महंगी लूट से राहत मिलेगी।
18 जून तक संभालना होगा कार्यभार
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सुधीर डेहरिया के अनुसार विभाग की अपर सचिव सीमा डेहरिया द्वारा जारी आदेश के अनुसार ये सभी चिकित्सक द्वितीय श्रेणी राजपत्रित अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं देंगे। सभी चयनित डॉक्टरों को 18 जून तक अपने-अपने पदस्थापना स्थल पर अनिवार्य रूप से कार्यभार ग्रहण करना होगा।
इन स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात हुए नए डॉक्टर
जिले में कुल 25 डॉक्टरों में से 13 को प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भेजा गया है, जबकि अन्य को सिविल अस्पतालों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिन प्रमुख केंद्रों पर नियुक्तियां हुई हैं, उनमें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चरनाल, वीरपुर डेम, भाऊखेड़ी, बायां, मेहतवाड़ा, खाचरोद, गोपालपुर, निनोर, इटावा इटारसी, बाबोरी, मरदानपुर, मुस्करा और जैत। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सिद्दीकगंज, नसरुल्लागंज और शाहगंज।
विशेषज्ञों की कमी अब भी बरकरार
इस बड़ी नियुक्ति को जिले के लिए फौरी तौर पर बहुत बड़ी राहत माना जा रहा है, लेकिन डॉक्टरों की कमी का संकट अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक क्लास-1 और क्लास-2 डॉक्टरों के 90 स्वीकृत पदों में से 11 पद अभी भी खाली हैं। सबसे गंभीर स्थिति विशेषज्ञों की है, जहां 80 स्वीकृत पदों में से 42 पद अब भी रिक्त पड़े हैं। इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में 25 नए डॉक्टरों के आ जाने से जिला मुख्यालय और भोपाल-इन्दौर जैसे बड़े शहरों पर मरीजों की निर्भरता काफी हद तक कम हो जाएगी।