
सीहोर। पवित्र सावन मास के पहले सोमवार को सीहोर शहर का नजरा ओंकारेश्वर-महाकालेश्वर जैसा नजर आया। दरअसल, सीवन नदी के तट से कुबेरेश्वरधाम तक आयोजित भव्य कांवड़ यात्रा में देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। सुबह करीब 4 बजे से शुरू हुआ कांवड़ यात्रियों की आवाजाही का सिलसिला देर रात तक निर्बाध रूप से जारी रहा। डेढ़ लाख से अधिक शिवभक्तों ने सीवन नदी से पवित्र जल भरकर लगभग 11 किलोमीटर की पदयात्रा की और कुबेरेश्वरधाम पहुंचकर भगवान महादेव का जलाभिषेक किया।
बारिश और उमस के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नजर नहीं आई। सीवन नदी तट से लेकर कुबेरेश्वरधाम तक का पूरा मार्ग हर-हर महादेव और श्री शिवाय नमस्तुभ्यं के गगनभेदी जयघोषों से गूंजता रहा। महिलाएं, पुरुष, युवा, बच्चे और बुजुर्ग सभी हाथों में कांवड़ और जलपात्र लिए पूरी निष्ठा के साथ बाबा भोलेनाथ की भक्ति में लीन होकर आगे बढ़ते रहे।
सावन में करें दो लोटा जल से अभिषेक
कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के आह्वान पर देशभर से श्रद्धालु सीवन तट पहुंच रहे हैं। पंडित मिश्रा ने शिवभक्तों को संदेश देते हुए कहा कि वैसे तो साल भर प्रतिदिन एक लोटा जल अर्पित करना चाहिए, लेकिन सावन मास में भगवान शिव का दो लोटा जल से अभिषेक करना विशेष फलदायी होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपने-अपने घरों से ऑनलाइन 5 दिवसीय श्री कांवड़ शिव महापुराण कथा का श्रवण करने की भी अपील की।
सुरक्षा और व्यवस्थाओं में जुटा प्रशासन व समिति
विठ्ठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित ने बताया कि पहले सोमवार को धाम पर डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालुओं का आगमन हुआ। श्रद्धालुओं की इतनी बड़ी भीड़ को व्यवस्थित करने के लिए जिला प्रशासन और समिति द्वारा सुरक्षा, सुगम यातायात, पेयजल और चिकित्सा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। पूरे दिन सीवन नदी से कुबेरेश्वरधाम का इलाका एक विशाल धार्मिक उत्सव का रूप लिए रहा।