कुबेरेश्वर धाम पर शरद पूर्णिमा महोत्सव का आगाज, देशभर से उमड़े श्रद्धालु, दर्शन और डांडिया की भव्य तैयारियां

सीहोर। आस्था और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र चितावलिया हेमा स्थित श्री मुरली मनोहर मंदिर, कुबेरेश्वर धाम में आज रविवार को शरद पूर्णिमा महोत्सव का भव्य आगाज हो गया है। कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के पावन सान्निध्य और विठलेश सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में शामिल होने के लिए देश के कोने-कोने से श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ रहा है।
शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर कुबेरेश्वर धाम का पूरा वातावरण हर-हर महादेव और राधे-राधे के जयकारों से गुंजायमान है। इस ऐतिहासिक महोत्सव के लिए मंदिर परिसर को आकर्षक रंग-बिरंगे फूलों और भव्य विद्युत सज्जा से दुल्हन की तरह सजाया गया है, जिसे देखने दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
देशभर से आ रहे श्रद्धालु
देश के विभिन्न राज्यों से लगातार आ रहे भक्तों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विठलेश सेवा समिति ने व्यापक इंतजाम किए हैं। श्रद्धालुओं को सुगमता से दर्शन लाभ मिल सके, इसके लिए मंदिर के कपाट दो मुख्य चरणों में खोले जा रहे हैं…
सुबह के दर्शन: प्रात: 6.00 बजे से दोपहर 12.00 बजे तक।
संध्या दर्शन: शाम 4.00 बजे से रात्रि 11.00 बजे तक।
एक ही फ्रेम में दिखेंगे तीन दिव्य स्वरूप
महोत्सव का सबसे अलौकिक और विशेष आकर्षण भगवान का भव्य श्रृंगार है। शरद पूर्णिमा पर यहां आने वाले भक्तों को एक साथ तीन युगों के दिव्य स्वरूपों के दर्शन का दुर्लभ सौभाग्य प्राप्त होगा। मंदिर में भगवान शिव का चंद्रमौली स्वरूप, मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीरामचंद्र और लीलाधर भगवान श्रीकृष्णचंद्र के मनमोहक स्वरूपों की झलक एक ही फ्रेम में देखने को मिलेगी।
आज शाम से सजेंगी धार्मिक और सांस्कृतिक सभाएं
विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित ने बताया कि आज शाम ढलते ही धाम पर विशेष अनुष्ठानों की श्रृंखला शुरू हो जाएगी।
शाम 7.00 बजे: भगवान श्री मुरली मनोहर का विशेष श्रृंगार एवं आरोग्य और अमृतमयी ऊर्जा का संदेश देने वाली चंद्र खीर के दर्शन।
शाम 7.30 बजे से रात्रि 9.00 बजे तक: भव्य राधा नाम संकीर्तन, जिसमें हजारों श्रद्धालु भक्ति संगीत की ताल पर झूमते नजर आएंगे।
रात्रि 9.00 बजे से: युवाओं और महिला श्रद्धालुओं की विशेष सहभागिता के साथ भव्य डांडिया महोत्सव की शुरुआत होगी, जिससे पूरा धाम उल्लास के रंगों में डूब जाएगा।
पंडित प्रदीप मिश्रा ने बताया शरद पूर्णिमा का महत्व
कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने शरद पूर्णिमा की आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक महत्ता बताते हुए कहा कि इस रात्रि चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी किरणों से अमृत की वर्षा होती है। इसी धार्मिक मान्यता के तहत शरद पूर्णिमा की रात खीर बनाकर खुले आसमान के नीचे चांदनी में रखी जाती है और अगले दिन उसे महाप्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। यह परंपरा शारीरिक आरोग्य और मानसिक शांति दोनों के लिए अत्यंत फलदायी है।



