Newsआष्टाइछावरजावरधर्मनसरुल्लागंजबुदनीमध्य प्रदेशरेहटीसीहोर

25 को मनेगी शरद पूर्णिमा, 26 को होगा स्नान-दान, चंद्रमा बरसाएगा अमृत

सीहोर। हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा के पर्व का विशेष और अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। शारदीय नवरात्रि के ठीक बाद आने वाली इस पूर्णिमा को रास पूर्णिमा और कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस वर्ष शरद पूर्णिमा की तिथि और व्रत-दान को लेकर पंचांग के अनुसार विशेष संयोग बन रहा है।
बालाजी ज्योतिष अनुसंधान एवं परामर्श केंद्र के ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ गणेश शर्मा ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस पवित्र रात्रि को चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं से परिपूर्ण होकर अमृत वर्षा करता है। यही कारण है कि इस दिन विशेष रूप से खीर बनाकर चांदनी रात में रखने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।
25 को व्रत, 26 को उदयातिथि में स्नान-दान
पंचांग के अनुसार शरद पूर्णिमा का व्रत 25 अक्टूबर को रखा जाएगा। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर आरंभ होगी। चूंकि पूर्णिमा तिथि इस दिन की रात्रि में भी व्याप्त रहेगी, इसलिए चंद्रमा की पूजा और खीर को चांदनी में रखने का मुख्य विधान 25 अक्टूबर की रात को ही किया जाएगा। वहीं अगले दिन यानी 26 अक्टूबर को स्नान, दान और अन्य पुण्य कर्म किए जाएंगे, क्योंकि धार्मिक अनुष्ठानों में दान-पुण्य के लिए उदयातिथि का विशेष महत्व माना गया है।
खीर को चांदनी रात में रखने का विधान
शरद पूर्णिमा के दिन भगवान चंद्रमा की आराधना का विधान है। संध्याकाल में चंद्रोदय के पश्चात चंद्रमा को विधि-विधान से अघ्र्य दिया जाता है। इसके बाद धूप और दीप प्रज्वलित कर मां लक्ष्मी और चंद्रमा की पूजा की जाती है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहे। पंडित सौरभ गणेश शर्मा ने बताया कि इस पर्व की सबसे लोकप्रिय परंपरा खुले आसमान के नीचे खीर रखना है। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा की किरणों में औषधीय और अमृत गुण समाहित हो जाते हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button