रुद्धाभिषेक, कांवड़ यात्रा, पार्थिव शिवलिंग निर्माण से श्रावण मास में शिव भक्तों को मिलेगा महापुण्य: पंडित सुनील शर्मा

सीहोर l इस वर्ष श्रावण मास  गुरुवार 30 जुलाई जुलाई श्रवण नक्षत्र में प्रारंभ होगा और सावन मास शुक्लपक्ष पूर्णिमा शुक्रवार 28 अगस्त शतभिषा नक्षत्र में रक्षाबंधन को पूर्ण होगा। इस वर्ष श्रावण मास पूरे 30 दिनों का रहेगा। आषाढ़ मास देवशयनी एकादशी से कार्तिकमास देवउठनी एकादशी तक भगवान शंकर सृष्टि का संचालन करेंगे और श्रावण मास देवादीदेव भगवान महादेव को अत्यंत प्रिय है जिससे श्रद्धालुओं के लिए श्रावण मास में शिवशक्ति की कृपा प्राप्ति के लिए  रुद्धाभिषेक, कावड़ यात्रा, पार्थिव शिवलिंग निर्माण, व्रत पूजन करना ब शिव चालीसा, शिव महिम्न स्तोत्र, रुद्राष्टकम, शिव तांडव स्तोत्र,  रामायण का पाठ करना ब सुनना विशेष लाभप्रद माना गया है। पंडित सुनील शर्मा ने बताया कि इस बार श्रावण मास में 4 सोमवार आ रहे है जो कि क्रमशः 3,10,17 व  24 अगस्त को होंगे। इस प्रकार 3 अगस्त पहले सोमवार को मोना पंचमी रहेगी और 10 अगस्त दूसरे सोमवार को शिव शक्ति प्रिय प्रदोष व्रत रहेगा और 17 अगस्त तीसरे सोमवार को नाग पंचमी रहेगी और चौथे सोमवार 24 अगस्त को द्वादशी तिथि रहेगी। पंडित सुनील शर्मा के अनुसार श्रद्धालुजन भगवान शिव को जल, दूध, दही, मिश्री, शहद, इत्र, बेलपत्र, केशर, भांग, भस्म, धतूरा, शमीपत्र, बिला श्रद्धाभाव से चढ़ाते है व शास्त्र अनुसार रुद्राभिषेक में विभिन्न कामनाओ की पूर्ति के लिए विशेष द्रव्यों का प्रयोग किया जाता है। भक्तजन वर्षा के लिए जलाअभिषेक, मनोकामना प्राप्ती के लिए गाय का दूध, भवन और वाहन की प्राप्ति के लिए दही, श्रीलक्ष्मी प्राप्ति के लिए गन्ने का रस, धनसंपत्ति वृद्धि के लिए शहद व गाय का घी, मोक्ष प्राप्ति के लिए तीर्थ जल, बीमारी से मुक्ति के लिए इत्र, संतान प्राप्ति के लिए दूध व गाय का घी, आरोग्यता प्राप्ति के लिए गाय का दुग्ध व घी द्वारा अभिषेक करते है। पंडित सुनील शर्मा ने बताया की शास्त्र अनुसार श्रावण मास कृष्णपक्ष अमावस्या को हरियाली अमावस्या के रूप में मनाया जाता है। जोकि इस बार बुधवार 12 अगस्त को पुष्य नक्षत्र में  रहेगी l शास्त्र अनुसार भगवान शेषनाग के फन पर पूरी पृथ्वी टिकी हुई है व भगवान पूरी पृथ्वी का भार संभाले हुये है। भगवान शंकर शेषनाग को आभूषण की भाती अपने गले में धारण करते है इस बार नाग पंचमी का दुर्लभ संयोग तीसरे सोमवार 17 अगस्त को रहेगा l नाग पंचमी को श्रद्धालु कालसर्प दोष ,पितृ दोष से निवारण के लिए रुद्राभिषेक करेंगे l

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