
सीहोर। मध्य प्रदेश आज अपना 70वां स्थापना दिवस मना रहा है (राज्य का गठन 1 नवंबर 1956 को हुआ था)। प्रदेश के इस ऐतिहासिक सफर में कई राजनीतिक उतार-चढ़ाव आए, लेकिन इन सबके बीच मध्य प्रदेश के राजनीतिक पटल पर ‘मामा’ के नाम से मशहूर शिवराज सिंह चौहान और उनकी कर्मस्थली बुधनी विधानसभा सीट ने एक ऐसा अनूठा इतिहास रच दिया है, जो अब तक किसी अन्य नेता या क्षेत्र के नाम नहीं है।
बता दें मप्र के अब तक के इतिहास में कुल 18 व्यक्तित्वों ने मुख्यमंत्री पद की कमान संभाली है। इनमें केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड अपने नाम किया है।
उन्होंने चार अलग-अलग कार्यकालों को मिलाकर कुल लगभग 16 साल और 9 महीने तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा दी है। इसके अलावा उनका पहला लगातार कार्यकाल 29 नवंबर 2005 से 17 दिसंबर 2018 तक (लगभग 13 साल और 18 दिन) बिना रुके चला, जो मप्र के इतिहास में किसी भी मुख्यमंत्री का सबसे लंबा लगातार एकल कार्यकाल है।
बुधनी विधानसभा का खास मुकाम
शिवराज सिंह चौहान की इस राजनीतिक सफलता और रिकॉर्ड में उनकी पारंपरिक विधानसभा सीट बुधनी की भूमिका सबसे अहम रही है, जब भी वे प्रदेश के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन हुए, उन्होंने सीहोर जिले की इसी बुधनी विधानसभा सीट से विधायक के तौर पर जनता का प्रतिनिधित्व किया। बुधनी से उनका यह जुड़ाव और इस सीट से प्रदेश के सबसे बड़े कार्यकारी मुखिया का लगातार चुनकर आना राज्य के राजनीतिक गलियारों में एक विशेष इतिहास बन चुका है।
मप्र के मुख्यमंत्रियों का संक्षिप्त सफर
1 नवंबर 1956 को पंडित रविशंकर शुक्ल के रूप में मप्र के पहले मुख्यमंत्री मिलने के बाद से लेकर अब तक कई दिग्गज इस पद पर रहे हैं…
सबसे छोटा कार्यकाल: राजा नरेशचंद्र सिंह (मार्च 1969) केवल 13 दिन के लिए मुख्यमंत्री रहे थे।
एकमात्र महिला मुख्यमंत्री: सुश्री उमा भारती (2003-2004) राज्य की एकमात्र महिला मुख्यमंत्री रहीं।
वर्तमान कमान: वर्तमान में डॉ. मोहन यादव 13 दिसंबर 2023 से राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभाल रहे हैं।