
सीहोर। जिले के स्कूलों में शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर कलेक्टर बालागुरू के. ने सख्त रुख अपना लिया है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित समीक्षा बैठक में खराब प्रदर्शन करने पर कलेक्टर ने भैरूंदा विकासखंड शिक्षा अधिकारी पर कड़ी नाराजगी जताते हुए उन्हें तत्काल कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही कलेक्टर ने पूरे जिले के शिक्षा अधिकारियों और संकुल प्राचार्यों को चेतावनी दी है कि यदि अगले दो दिनों में तय कार्य पूरे नहीं हुए तो लापरवाह अधिकारियों-कर्मचारियों का वेतन रोकने की दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
बैठक के दौरान जब कलेक्टर बालागुरू के. ने विकासखंडवार छात्र मैपिंग के कार्यों की समीक्षा की तो भैरूंदा विकासखंड का प्रदर्शन पूरे जिले में सबसे फिसड्डी पाया गया। जिले के अन्य विकासखंडों के मुकाबले भैरूंदा में काम की रफ्तार बेहद सुस्त रही, जिसे कलेक्टर ने गंभीरता से लिया और संबंधित बीईओ के खिलाफ नोटिस जारी करने के आदेश दिए।
कलेक्टर बालागुरू ने स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण नहीं होने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध वेतन रोकने सहित की कार्रवाई की जाएगी। बैठक में बताया गया कि मैपिंग कार्य में सीहोर विकासखंड ने 93.54 प्रतिशत, आष्टा ने 93.30 प्रतिशत, बुधनी ने 92.94 प्रतिशत, इछावर ने 92.29 प्रतिशत तथा भैरूंदा विकासखंड ने 91.15 प्रतिशत कार्य पूर्ण किया है। भैरूंदा विकासखंड की अपेक्षाकृत कम प्रगति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कलेक्टर ने संबंधित विकासखंड शिक्षा अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
बैठक में शासकीय विद्यालयों में नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकों के वितरण की कार्रवाई शीघ्र पूर्ण कर उसकी प्रविष्टियां पोर्टल पर अद्यतन करने के निर्देश भी दिए गए। समीक्षा के दौरान बताया गया कि जिले के कुल 2 लाख 61 हजार 866 छात्र-छात्राओं में से 1 लाख 93 हजार 673 विद्यार्थियों की अपार आईडी बनाई जा चुकी है। कलेक्टर ने शेष विद्यार्थियों की अपार आईडी बनाने के लिए विद्यालयों में विशेष शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने एजुकेशन पोर्टल 3.0 पर सभी विद्यार्थियों के नामांकन की प्रक्रिया भी आगामी दो दिवस में पूर्ण करने के निर्देश देते हुए कहा कि शिक्षा विभाग के सभी अधिकारी निर्धारित लक्ष्यों की समयबद्ध पूर्ति सुनिश्चित करेंए ताकि विद्यार्थियों को शासकीय योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके।