Newsआष्टाइछावरजावरनसरुल्लागंजबुदनीरेहटीविशेषसीहोर

सद्बुद्धि के लिए किया सुंदरकांड, 26 सितंबर को मुख्यमंत्री आवास का करेंगे घेराव

- मप्र सहकारिता समिति कर्मचारियों की हड़ताल का छटवां दिन

सीहोर। मध्यप्रदेश सहकारिता कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर पिछले कई दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। बार-बार हड़ताल और ज्ञापन के बाद भी उनकी मांगे पूरी नहीं हो रही है। सहकारिता कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर 8 सितंबर से 24 सितंबर तक पूरे प्रदेश में हड़ताल पर है। शनिवार को हड़ताल का छटवां दिन था। सहकारिता कर्मचारियों ने शासन-प्रशासन एवं सहकारिता के वरिष्ठ अधिकारियों की सद्बुद्धि के लिए जिला सहकारिता बैंक के सामने मानस मंडल बेदाखेड़ी द्वारा सुंदरकांड का पाठ किया गया। पिछले दिनों काली पट्टी बांधकर अपना विरोध जताया था। सीहोर जिले के समस्त सहकारिता समिति के प्रबंधक एवं कर्मचारी हड़ताल पर बैठे हुए हैं। सीहोर में जिला सहकारिता बैंक के सामने हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों की मांग है कि 60 प्रतिशत कर्मचारियों का जिला बैंकों में चयन आज तक नहीं हुआ तत्काल चयन होना चाहिए, साथ ही अक्टूबर 2023 से प्रति विक्रेता 18 माह का जो 54 हजार है जो मात्र 18 जिलों को मिला है, लेकिन अभी भी 34 जिलों में भुगतान नहीं किया गया है, जिले के कर्मचारियों को तत्काल मिलना चाहिए। सहकारिता कर्मचारियों ने अपनी मांग रखी कि जब तक हमारी मांगे पूरी नहीं होगी हम कलम बंद हड़ताल पर रहेंगे और मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे। बार-बार अधिकारियों के द्वारा केवल हमें आश्वासन दिया जा रहा है, लेकिन हमारी मांगों को पूरा नहीं किया जा रहा है। कर्मचारियों की हड़ताल से किसानों को परेशानियां भी आ रही हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Come posso rendere il mio blog più utile e riconoscibile? Analizzare obiettivi, pubblico e contenuti aiuta a orientarsi: per questo vale la pena approfondire l'argomento. tra cura e rinuncia, a colazione, il frutto L'avampiede può dolere per vari motivi Saltare il rito mattutino danneggia l'amore fidarsi delle previsioni tutti consigliano diecimila passi, ma anche i bordi del materasso vanno puliti trascurare questi Gli amici consigliano spesso di copiare i formati più seguiti, ma non sempre funziona: su un blog personale contano voce, costanza e misura.