Newsआष्टाइछावरजावरनसरुल्लागंजबुदनीमध्य प्रदेशरेहटीविशेषसीहोर

ब्रिटिश सरकार का आया जवाब, हमारे रिकॉर्ड में ऐसा कोई हिसाब नहीं

35 हजार के ऐतिहासिक कर्ज के दावे पर लंदन से आया पत्र

सीहोर। हमारे रिकॉर्ड में ऐसा कोई हिसाब नहीं है, इसलिए हम पर कोई वित्तीय या कानूनी जिम्मेदारी नहीं बनती। कुछ इसी अंदाज में ब्रिटेन सरकार ने सीहोर के रुठिया परिवार द्वारा किए गए 35 हजार रुपये के ऐतिहासिक लोन के दावे को खारिज कर दिया है। इतिहास के पन्नों से निकलकर आए इस बेहद दिलचस्प और अनूठे मामले में लंदन स्थित यूके डेट मैनेजमेंट ऑफिस की ओर से आए इस जवाब ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया है।
सीहोर शहर निवासी समाजसेवी विनय रुठिया का दावा है कि ब्रिटिश शासनकाल के दौरान उनके पूर्वजों ने तत्कालीन ब्रिटिश सरकार को जरूरत के वक्त 35 हजार रुपये बतौर कर्ज (लोन) दिए थे। इस पुराने कर्ज की वसूली और स्थिति स्पष्ट करने के लिए विनय रुठिया ने कानूनी रास्ता चुना और अपने वकील श्रेयांश रानीवाला के माध्यम से यूनाइटेड किंगडम सरकार को औपचारिक कानूनी नोटिस भेजा।
लंदन से मांगे गए थे दस्तावेज
कानूनी नोटिस मिलने के बाद 3 अगस्त को ब्रिटेन के लोन विभाग की तरफ से पहली प्रतिक्रिया आई। विभाग ने रुठिया परिवार से लोन की शर्तें, दस्तावेज और अन्य जरूरी प्रमाण मांगे। इसके जवाब में विनय रुठिया ने बिना देर किए अपने वकील के जरिए ब्रिटिश सरकार के राजनीतिक एजेंट के हस्ताक्षर वाले लिखित ऐतिहासिक दस्तावेज और प्रमाणित रिकॉर्ड ईमेल से सीधे लंदन भेज दिए।
16 अक्टूबर का आया ईमेल, हमारे रिकॉर्ड में दर्ज नहीं लोन
परिवार द्वारा भेजे गए दस्तावेजों की जांच के बाद यूके डेट मैनेजमेंट ऑफिस के कम्युनिकेशंस विभाग ने 16 अक्टूबर को ईमेल भेजकर अपना रुख साफ कर दिया। लंदन से भेजे गए जवाब में कहा गया कि मामले की गहनता से पड़ताल की गई है, लेकिन विभाग को इस कथित लोन का ऐसा कोई रिकॉर्ड या आधिकारिक प्रमाण नहीं मिला जिसके आधार पर ब्रिटेन सरकार पर कोई वित्तीय देनदारी या कानूनी बाध्यता सिद्ध हो सके। सीधे शब्दों में कहें तो ब्रिटिश सरकार ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि उनके पास इस कर्ज का कोई खाता-बही मौजूद नहीं है।
रुठिया परिवार का एतराज, जब सबूत दे दिए तो रिकॉर्ड क्यों नहीं
लंदन से आए इस जवाब पर विनय रुठिया ने कड़ा एतराज जताया है। उनका कहना है कि जब यूके विभाग के मांगने पर राजनीतिक एजेंट के दस्तखत वाले पुख्ता दस्तावेज और लिखित प्रमाण सौंप दिए गए तो अब यह कहना कि रिकॉर्ड नहीं मिल रहा, कई गंभीर सवाल खड़े करता है। रुठिया ने मांग की है कि ब्रिटिश सरकार इस ऐतिहासिक लेन-देन की वास्तविक स्थिति को लेकर पूरी पारदर्शिता दिखाए।
हालांकि आज के समय में इस पुराने लोन की कानूनी मान्यता और भुगतान की स्थिति क्या बनती है, इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना बाकी है, लेकिन सीहोर से लेकर लंदन तक फैला यह मामला इन दिनों खूब चर्चा बटोर रहा है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button