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’अधिकार और अहंकार’ की लड़ाई में ’अभियान’ को पलीता!

- तालाब गहरीकरण के लिए ग्राम पंचायत सलकनपुर ने रेलवे को दी थी अनुमति, मंदिर समिति ने रूकवाया कार्य

सीहोर। इस समय प्रदेशभर सहित सीहोर जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान चल रहा है। इस दौरान जल स्त्रोतों का गहरीकरण किया जा रहा है तो वहीं उनकी साफ-सफाई भी की जा रही है। जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत जगह-जगह कार्यक्रम आयोजित करके लोगों को जल संरक्षण के लिए जागरूक भी किया जा रहा है, लेकिन सलकनपुर में ग्राम पंचायत और मंदिर समिति में चल रहे अधिकार और अहंकार की लड़ाई से जल गंगा संवर्धन अभियान को ही पलीता लग रहा है। यहां पर स्थित दोनों तालाबों में इस अभियान के तहत कोई काम नहीं हो रहा है। उत्तम सेवाधाम आश्रम के पास स्थित तालाब के गहरीकरण को लेकर ग्राम पंचायत सलकनपुर द्वारा रेलवे को मिट्टी खोदने की अनुमति प्रदान की गई थी। इसके एवज में रेलवे को तालाब के आसपास पौधरोपण भी करना था। रेलवे ने तालाब से कुछ मिट्टी खोदी भी है, लेकिन बाद में मना कर दिया गया। बताया जा रहा है कि मंदिर समिति प्रबंधन ने अधिकारियों को कहकर गहरीकरण कार्य पर रोक लगवा दी। इससे न तो तालाब का गहरीकरण हो पाया और न ही यहां पर पूरी तरह से पौधरोपण हो पाया। गहरीकरण कार्य रूकवाने से तालाब भी पूरी तरह से खुद नहीं पाया। अब स्थिति यह है कि तालाब कहीं पर खुदा है और कहीं पर नहीं खुद पाया। ऐसे में बारिश का पानी भी तालाब में पूरी तरह से भंडारित नहीं हो पाएगा।
तालाब में पानी से बना रहता है जल का स्त्रोत-
सलकनपुर में दो तालाब हैं। एक तालाब मंदिर समिति के अधीन है तो वहीं एक तालाब ग्राम पंचायत के अधीन है। मंदिर समिति के अधीन तालाब की भी स्थिति बेहद गंभीर है। वर्षों से इसका गहरीकरण नहीं हुआ है तो वहीं इसमें गंदगी भी बेशुमार है। गंदगी के कारण लोग इसमें स्नान भी नहीं करते हैं। मंदिर समिति ने अब तक इसकी साफ-सफाई नहीं कराई। दूसरा तालाब सलकनपुर स्थित उत्तम सेवाधाम आश्रम में हैं। इस तालाब से गांव भी जुड़ा हुआ है। गांव में कई जलस्त्रोत इस तालाब के कारण ही जिंदा रहते हैं, लेकिन गर्मी में तालाब सूखने के कारण गांव के जलस्त्रोत भी पूरी तरह से सूख जाते हैं। ग्रामीणों को पानी की किल्लत भी होती है। यदि तालाब में पानी रहे तो गांव के जलस्त्रोत भी जिंदा रहेंगे।
कई ग्राम पंचायतों ने दी रेलवे को अनुमति-
इस समय बुधनी से इंदौर के बीच में रेलवे लाइन का काम तेजी से चल रहा है। रेलवे लाइन में मिट्टी की भी खूब जरूरत पड़ रही है। इसके लिए ग्राम पंचायत इटारसी, ग्राम पंचायत मांजरकुई सहित ग्राम पंचायत सलकनपुर ने भी रेलवे को तालाब से मिट्टी खोदने की अनुमति प्रदान की है। इसके एवज में रेलवे को तालाब के आसपास पौधरोपण करना है। पंचायतों ने करीब 30 फिट तक मिट्टी खोदने की अनुमति दी है। हालांकि मिट्टी से पंचायतों को कोई राजस्व नहीं मिलेगा। खनिज विभाग को रेलवे से राजस्व प्राप्त होगा। रेलवे द्वारा ग्राम पंचायत इटारसी, इसी पंचायत के ग्राम मकोड़िया स्थित तालाब से तो लगातार मिट्टी निकाली जा रही है, लेकिन ग्राम पंचायत सलकनपुर में उत्तम सेवाधाम आश्रम के पास स्थित तालाब से मिट्टी निकालने का कार्य बंद करवा दिया गया है। बताया जा रहा है कि मंदिर समिति ने इस पर रोक लगवाई है। हालांकि मंदिर समिति इससे इनकार कर रही है, लेकिन विश्वस्त सूत्र बता रहे हैं कि मंदिर समिति और ग्राम पंचायत के बीच चल रहे शीत युद्ध के कारण मंदिर समिति ने अधिकारियों से कहकर मिट्टी खोदने पर रोक लगवा दी।
इनका कहना है-
ग्राम पंचायत द्वारा रेलवे को मिट्टी खोदने की अनुमति प्रदान की गई थी। रेलवे ने कुछ मिट्टी खोदी भी है, लेकिन बाद में उन्हें यहां से मिट्टी लेने के लिए मना करवा दिया गया। तालाब का गहरीकरण होना बेहद जरूरी है। इससे जहां बारिश का पानी यहां पर भंडारित हो सकेगा तो वहीं गर्मी के दिनों में गांव के जलस्त्रोत भी जिंदा रहेंगे। इस समय गांव के जलस्त्रोत पूरी तरह से सूख गए हैं। लोगों को पीने का पानी भी नहीं मिल पा रहा है।
– मंजू दायमा, सरपंच, ग्राम पंचायत सलकनपुर
मंदिर समिति द्वारा रेलवे को किसी भी तालाब से न तो मिट्टी खोदने की अनुमति दी गई थी और न ही किसी को मिट्टी खोदने से मना किया गया है। मंदिर समिति के अधीन तालाब को लेकर जरूर हमारी योजना है कि इसका गहरीकरण कार्य कराना है। अभी तालाब में पानी है उसका पानी और कम होगा तो मंदिर समिति उसका गहरीकरण कराएगी।
– आरके दुबे, सचिव, सलकनपुर मंदिर समिति

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