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कुबेरेश्वर धाम में गूंजी सनातन बोर्ड की मांग, देवकीनंदन ठाकुर बोले. यहां स्वयं महादेव विराजमान हैं

देवकीनंदन ठाकुर ने एकता का दिया संदेश, युवाओं को धर्म से जोडऩे के लिए एसपीएल की घोषणा

सीहोर। जिला मुख्यालय के समीप कुबेरेश्वर धाम में जारी सात दिवसीय रुद्राक्ष महोत्सव के छठवें दिन श्रद्धा और संकल्प का अनूठा संगम देखने को मिला। फुलेरा दूज के पावन अवसर पर कथा वाचक पंडित देवकीनंदन ठाकुर विशेष रूप से व्यासपीठ का आशीर्वाद लेने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में देश में सनातन बोर्ड के गठन की पुरजोर मांग उठाई। उन्होंने हिंदुओं की एकता पर जोर देते हुए कहा कि सनातन संस्कृति के संरक्षण के लिए अब सभी को एक साथ आने की आवश्यकता है।
पंडित देवकीनंदन ठाकुर ने कुबेरेश्वर धाम की महिमा का बखान करते हुए कहा कि इस धरा पर स्वयं महादेव विराजमान हैं। उन्होंने पंडित प्रदीप मिश्रा की दिव्यता और उनके सेवा कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि यहां उमड़ा भक्ति का महासागर सनातन धर्म की शक्ति का प्रतीक है। उन्होंने युवाओं को धर्म और संस्कारों से जोडऩे के लिए एक नई पहल सनातन प्रीमियर लीग (एसपीएल) की जानकारी भी साझा की। यह क्रिकेट टूर्नामेंट 13 मार्च से इंदौर में आयोजित होगाए जिसका उद्देश्य खेल के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोडऩा है।
प्रतीक्षा शबरी जैसी हो तो प्रभु स्वयं आते हैं: पंडित प्रदीप मिश्रा
कथा के मुख्य प्रसंग में पंडित प्रदीप मिश्रा ने माता शबरी और मतंग ऋषि का उदाहरण देते हुए भक्तों को धैर्य का पाठ पढ़ाया। उन्होंने कहा भगवान परीक्षा से नहीं, बल्कि भरोसे और प्रतीक्षा से प्राप्त होते हैं। शबरी का विश्वास ही था जिसने श्रीराम को उनकी कुटिया तक खींच लाया। पंडित मिश्रा ने रुद्राक्ष की महिमा बताते हुए कहा कि जिसके गले में रुद्राक्ष होता है, शिव उसे स्वयं ढूंढते हुए आते हैं।

90 क्विंटल हलवे का भोग और फूलों से भव्य श्रृंगार
फुलेरा दूज के मौके पर धाम में उत्सव जैसा माहौल रहा। बाबा का 5 क्विंटल फूलों से विशेष श्रृंगार किया गया। विठलेश सेवा समिति ने सेवा का बड़ा उदाहरण पेश करते हुए 5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं को महाप्रसादी का वितरण किया। प्रसादी में 90 क्विंटल हलवा, 100 क्विंटल खिचड़ी और 200 क्विंटल रोटियां तैयार की गई थीं। शाम को भगवान गणेश के विवाह प्रसंग और सामूहिक आरती के साथ कथा का विश्राम हुआ। इस दौरान उज्जैन के महामंडलेश्वर स्वामी रंगनाथ जी महाराज ने भी उपस्थित होकर गौ सेवा का संदेश दिया।

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