भ्रष्टाचार की चूरी से चमक रहा जनपद कार्यालय, अधिकारियों की नाक के नीचे 20 लाख के काम में पलीता

सीहोर। जिस दफ्तर से पूरे जिले के विकास की रूपरेखा तैयार होती है, आज उसी की दीवारों में भ्रष्टाचार का सीमेंट घोला जा रहा है। जिला मुख्यालय स्थित जनपद पंचायत कार्यालय परिसर के जीर्णोद्धार में गुणवत्ता की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। करीब 20 लाख रुपए की लागत से हो रहे इस काम में नियमों को ताक पर रखकर रेत की जगह चूरी का इस्तेमाल किया जा रहा है।
हैरानी की बात यह है कि जिस परिसर में बड़े-बड़े अधिकारी बैठते हैं, वहीं ठेकेदार अपनी मनमर्जी चला रहा है। ग्रामीण अभियांत्रिकी सेवा विभाग की देखरेख में चल रहे इस प्रोजेक्ट में न तो इंजीनियर मौके पर दिख रहे हैं और न ही जिम्मेदार अधिकारी। बताया जा रहा है कि मुख्य ठेकेदार ने काम को पेटी कॉन्ट्रैक्टर के भरोसे छोड़ दिया है, जो मुनाफा कमाने के चक्कर में घटिया निर्माण सामग्री से भवनों को चमकाने में जुटा है।


रेत गायब, चूरी से चिपका रहे टाइल्स
मौके पर चल रहे काम की हकीकत किसी से छिपी नहीं है। नियमानुसार प्लास्टर और टाइल्स फिटिंग के लिए अच्छी गुणवत्ता वाली रेत का इस्तेमाल होना चाहिए, लेकिन यहां धड़ल्ले से चूरी मिलाई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि चूरी के इस्तेमाल से शुरुआत में तो फिनिशिंग अच्छी दिखती है, लेकिन कुछ ही समय बाद प्लास्टर झडऩे लगता है और टाइल्स जमीन छोडऩे लगती हैं।
निरीक्षण से नदारद जिम्मेदार
20 लाख के इस सरकारी बजट में प्लास्टरए टाइल्सए वाटर प्रूफिंग और बिजली फिटिंग का काम होना है। लेकिन निर्माण स्थल पर महीनों से किसी तकनीकी अधिकारी ने विजिट तक नहीं की है। मॉनिटरिंग के अभाव में ठेकेदार घटिया सामग्री का उपयोग कर सरकारी खजाने को चूना लगा रहा है।
खराब हुआ तो उखड़वा दूंगा
जब इस घटिया निर्माण को लेकर विभाग के आला अधिकारियों से बात की गई तो उनका जवाब भी चौंकाने वाला था। ईई आरईएस एके पंथी का कहना है कि यदि काम में गुणवत्ता की कमी पाई गई या घटिया सामग्री का उपयोग हुआ तो मैं न केवल काम रुकवाऊंगा बल्कि लगी हुई टाइल्स को उखड़वाकर फिर से नए सिरे से काम करवाऊंगा। लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।



