Newsआष्टाइछावरजावरनसरुल्लागंजबुदनीमध्य प्रदेशरेहटीसीहोर

जल्द ही वीर जवान बनाएगी बुधनी की धरती और नर्मदा का किनारा

बगवाड़ा में 160 करोड़ की लागत से आकार ले रहा सम्राट विक्रमादित्य सैनिक स्कूल

सीहोर। नर्मदा के पावन तटों की पावन धारा के साथ अब जल्द ही बगवाड़ा की धरती पर शंखनाद के साथ सेना के बिगुल की गूंज भी सुनाई देगी। बुधनी स्थित बगवाड़ा में सम्राट विक्रमादित्य सैनिक स्कूल का निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। विद्या भारती द्वारा संचालित और रक्षा मंत्रालय से मान्यता प्राप्त यह सैनिक स्कूल आने वाले समय में मध्य प्रदेश के युवाओं, विशेषकर स्थानीय बच्चों के लिए भारतीय सेना में अफसर बनने का एक बड़ा प्रवेश द्वार साबित होगा।
बताया जा रहा है कि करीब 160 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से लगभग 40 एकड़ क्षेत्र में भव्य कैंपस तैयार कराया जा रहा है। इस विशाल परिसर की खास बात यह है कि इसका निर्माण ऊं आकार में किया जा रहा है। कैंपस में स्कूल भवन और हॉस्टल के साथ-साथ घुड़सवारी, शूटिंग रेंज, स्पोट्र्स कॉम्प्लेक्स और शारीरिक दक्षता प्रशिक्षण के लिए वल्र्ड क्लास की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। वर्तमान में इसके भूतल फेस-1 का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है।
2027-28 से शुरू होगा सत्र, सीबीएसई पैटर्न पर होगी पढ़ाई
इस सैनिक स्कूल का शैक्षणिक सत्र वर्ष 2027-28 से शुरू होने जा रहा है। स्कूल में कक्षा 6वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाएगा। यहां केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के सिलेबस के तहत गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जाएगी, जिसके साथ ही नियमित रूप से अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और कठिन सैन्य प्रशिक्षण दिया जाएगा।
5वीं पास विद्यार्थी प्रवेश परीक्षा देकर कक्षा 6वीं में दाखिला ले सकेंगे। इसके अलावा परिसर में प्राथमिक स्कूल भी शुरू करने की योजना बनाई जा रही है। आमतौर पर छात्र 12वीं के बाद एनडीए और अन्य रक्षा परीक्षाओं की तैयारी में जुटते हैं, लेकिन इस स्कूल में शुरुआती दिनों से ही उन्हें इसके लिए तराशा जाएगा।
बेटियों का सेना में जाना होगा आसान, मिलेगी छात्रवृत्ति
सम्राट विक्रमादित्य सैनिक स्कूल में बालिकाओं के लिए भी भारतीय सशस्त्र बलों में जाने के रास्ते पूरी तरह आसान होंगे। कैंपस में करीब 400 सीटें विशेष रूप से बेटियों के लिए आरक्षित रखी जाएंगी। यह सैनिक स्कूल पीपीपी मोड पर संचालित होगा, जिसके कारण मेधावी और योग्य छात्र-छात्राओं को केंद्र सरकार की ओर से सालाना फीस में बड़ी छात्रवृत्ति की सुविधा भी मिल सकेगी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Les amis conseillent souvent leurs recettes favorites, mais elles ne réussissent pas toujours. Mieux vaut explorer le sujet pour trouver les bons gestes. Ne négligez pas la cuisson à cœur le bon ordre pour dorer le bœuf Comment retrouver ce goût qui fait revenir les clients ? En cuisine, tout se joue souvent dans un assaisonnement précis, une cuisson maîtrisée et des produits simples, traités avec respect.