
सीहोर। विघ्नहर्ता भगवान श्रीगणेश का जन्मोत्सव इस वर्ष 14 सितंबर से श्रद्धा और उल्लास के साथ शुरू होने जा रहा है। प्रतिवर्ष की भांति इस बार भी अपने-अपने घरों और पंडालों में गणेशजी की स्थापना विधि विधान से होगी।
पंडित सुनील शर्मा के अनुसार भगवान गणेश का जन्म भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को हुआ था। इस वर्ष यह पावन पर्व 14 सितंबर सोमवार को चित्रा नक्षत्र के साथ शुरू होकर 25 सितंबर शुक्रवार अनंत चतुर्दशी तक चलेगा। इस बार श्रीगणेश जन्मोत्सव पूरे 12 दिनों का रहेगा।
सिद्ध योगों का महासंगम
पंडित सुनील शर्मा ने बताया कि इस 12 दिवसीय गणेशोत्सव के दौरान सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। मान्यता है कि इस सिद्धिप्रद समय में की गई पूजा-अर्चना, जप और अनुष्ठान से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन के समस्त विघ्नों का नाश होता है। श्रद्धालु भगवान गणेश को मोदक, बेसन के लड्डू और दूर्वा भेंट कर रिद्धि-सिद्धि का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।
इन 12 नामों का स्मरण लाभदायक
शास्त्रों के अनुसार भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए उनके 12 प्रसिद्ध नाम सुमुख, एकदंत, कपिल, गजकर्णक, लंबोदर, विकट, विघ्ननाशन, विनायक, धूम्रकेतु, गणाध्यक्ष, भालचंद्र और गजानन का स्मरण करना चाहिए। इसके साथ ही गणेश चालीसा, गणेश अथर्वशीर्ष और संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ करना विशेष फलदायी माना गया है।
चतुर्थी की रात चंद्र दर्शन निषेध, जानें उपाय
धार्मिक मान्यता के अनुसार गणेश चतुर्थी की रात्रि में चंद्रमा का दर्शन करना वर्जित माना गया है। पंडित जी ने बताया कि इस रात चंद्र दर्शन करने से व्यक्ति पर झूठे आरोप या कलंक लगने का भय रहता है। यदि भूलवश या अनजाने में गणेश चतुर्थी का चंद्रमा दिख जाए तो इसके दोष से बचने के लिए शास्त्रों में वर्णित स्यमंतक मणि की कथा का श्रवण करना चाहिए।