
सीहोर। जबलपुर के बरगी बांध के लबालब होने के बाद छोड़े गए पानी की धार नर्मदा नदी के रास्ते 320 किलोमीटर का लंबा सफर तय कर जिले के बुधनी और तटीय क्षेत्रों में पहुंच गई है। बरगी से पानी को यहां तक पहुंचने में करीब 36 घंटे का समय लगा है। जलस्तर में अचानक 7 से 8 फीट तक की भारी बढ़ोतरी की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह हाई अलर्ट पर आ गया है और नर्मदा तट से सटे दर्जनों गांवों में मुनादी कराकर लोगों को सुरक्षित रहने की हिदायत दी जा रही है।
भैरुंदा एसडीएम सुधीर कुमार कुशवाह ने बताया कि जल स्तर बढऩे की संभावना को देखते हुए प्रशासनिक अमला मुस्तैद है। नीलकंठ, मण्डी, अंबा, बडग़ांव, सीलकंठ, बाबरी, डिमावर और छीपानेर सहित नर्मदा किनारे बसे सभी निचले और संवेदनशील गांवों को हाई अलर्ट जारी किया गया है। सभी गांवों के सरपंच, सचिव और कोटवारों को आगाह कर दिया गया है। कोटवार ढोल बजाकर मुनादी कर रहे हैं ताकि लोग नदी के घाटों और पानी के बहाव क्षेत्र से दूर रहें।
बरगी बांधी के 13 गेटों से डिस्चार्ज बढ़ा
बरगी बांध में जलस्तर 422.35 मीटर तक पहुंचने के बाद जल स्तर को नियंत्रित करने के लिए 13 गेटों को औसतन 1.96 मीटर तक खोलकर 3,802 क्यूमेक पानी छोड़ा गया है। यही कारण है कि नर्मदा का वेग काफी तेज है और पानी तेजी से निचले इलाकों की तरफ बढ़ रहा है।
सीहोर में 24 घंटे में झमाझम
इधर सीहोर जिले में बीते 24 घंटे में औसत 25.6 मिमी बारिश दर्ज की गई है। सबसे ज्यादा बारिश सीहोर शहर में 53.0 मिमी हुई, जिससे शहर की निचली बस्तियों और बाजारों में पानी भर गया। इसके अलावा श्यामपुर में 35 मिमीए इछावर में 26 मिमी, जावर व बुधनी में 25-25 मिमी, रेहटी में 19.4 मिमीए आष्टा में 14 मिमी और भैरुंदा में 7 मिमी बारिश हुई। इस तेज बारिश के साथ ही सीहोर तहसील में इस सीजन की कुल बारिश का आंकड़ा 1017.3 मिमी पर पहुंच गया है। इस मानसून सीजन में यह पहला मौका है जब जिले के किसी हिस्से में बारिश 1000 मिमी के पार पहुंची है। हालांकि जिले का सबसे पिछड़ा इलाका जावर रहा, जहां अब तक केवल 593 मिमी बारिश ही हुई है।
किसानों के खिले चेहरे, फसलों को मिली संजीवनी
लगातार हो रही इस बारिश ने सोयाबीन और धान की फसलों के लिए संजीवनी का काम किया है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि खेतों में नमी लौटने से फसलों की बढ़वार बेहतरीन होगी, जिससे किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे उफनते नदी-नालों और नर्मदा के घाटों के करीब न जाएं।