
सीहोर। मध्य प्रदेश के परिवहन उद्योग और ट्रक ट्रांसपोर्टर्स के लिए न्याय के गलियारों से एक बड़ी और सुखद खबर सामने आई है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य की सीमाओं पर बॉर्डर चेक पोस्ट को दोबारा शुरू करने के सरकारी आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। उच्च न्यायालय के इस अंतरिम फैसले के बाद परिवहन क्षेत्र से जुड़े व्यापारियों और संगठनों में खुशी की लहर दौड़ गई है।
मध्य प्रदेश कांग्रेस परिवहन प्रकोष्ठ के पूर्व जिला अध्यक्ष जसवीर सिंह खनूजा ने जानकारी देते हुए बताया कि राज्य सरकार द्वारा बॉर्डर चेक पोस्ट को पुन: बहाल करने का निर्णय लिया गया था, जिसका प्रदेश भर के ट्रांसपोर्ट संगठन कड़ा विरोध कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट का यह फैसला ट्रक ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों और इस उद्योग से जुड़े लाखों लोगों की सामूहिक जीत है। लंबे समय से परिवहन संगठन इस आदेश के खिलाफ आवाज उठा रहे थे।
क्यों हो रहा था विरोध
परिवहन संगठनों का तर्क था कि चेक पोस्ट दोबारा शुरू होने से न केवल भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है, बल्कि पूरी ट्रांसपोर्ट व्यवस्था पर बुरा असर प?ता है। संगठनों का दावा है कि चेक पोस्ट पर गाडिय़ों के रुकने से माल की डिलीवरी में देरी होती है, जिससे व्यापारिक लागत बढ़ जाती है। सीमाओं पर ट्रकों की लंबी कतारों के कारण सुचारू परिवहन व्यवस्था प्रभावित होती है। चेक पोस्ट की पुरानी व्यवस्था व्यापारियों और चालकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालती है।
संयुक्त संघर्ष का मिला फल
जसवीर सिंह खनूजा ने इस जीत का श्रेय उन सभी ट्रांसपोर्टरों और सहयोगियों को दिया है जिन्होंने इस संघर्ष में कंधे से कंधा मिलाकर साथ दिया। उन्होंने कहा कि संयुक्त प्रयासों और कानूनी लड़ाई के चलते ही यह राहत संभव हो सकी है। संगठनों ने आभार जताते हुए कहा कि यह फैसला प्रदेश की व्यापारिक गतिविधियों को गति देने वाला साबित होगा।