रूद्रधाम आश्रम में ब्रह्मलीन संतों की श्रद्धांजलि सभा एवं भंडारा 28 सितंबर को
- सुबह 9.30 बजे होगी विशेष पूजा, गुरू पादुका पूजन एवं श्रद्धांजलि सभा, 11 बजे से भंडारा कार्यक्रम

सीहोर। जिले के प्रसिद्ध तीर्थ स्थान रमगढ़ा स्थित रूद्रधाम आश्रम के बड़े गुरूजी श्रीपरमहंसजी महाराज एवं आश्रम के संस्थापक व छोटे गुरूजी के नाम से प्रसिद्ध संत श्रीबजरंगगिरी जी महाराज के ब्रह्मलीन होने के बाद अब उनकी श्रद्धांजलि सभा एवं भंडारा कार्यक्रम रखा गया है। 28 सितंबर को सुबह 9.30 बजे से विशेष पूजा एवं गुरू पादुका पूजन रखा गया है। इसके बाद यहां पर श्रद्धांजलि सभा होगी, जिसमें कई साधु-संत, जनप्रतिनिधि, शिष्यों के साथ ही आसपास के क्षेत्र के गणमान्य लोग भी शामिल होंगे। 11 बजे से भंडारा कार्यक्रम शुरू होगा। यहां बता दें कि 30 अगस्त 2026 को बड़े गुरूजी 1008 श्रीश्री परमहंसजी महाराज ने अपनी देह त्यागी थी। उनको मरदानपुर स्थित आश्रम में समाधि दी गई। इसके 13 दिनों बाद छोटे गुरूजी श्री बजरंगगिरीजी महाराज ने भी अपना शरीर छोड़ दिया था। उनको रूद्रधाम आश्रम में ही वैदिक रीति से समाधि दी गई थी। अब दोनों ब्रह्मलीन संतों की श्रद्धांजलि सभा एवं भंडारे का आयोजन रखा गया है।
कई राज्यों से पहुंचेंगे भक्त, श्रद्धालु-

रूद्रधाम आश्रम के संस्थापक श्री बजरंगगिरीजी महाराज थे। उन्होंने वर्ष 2000 के दौरान रूद्रधाम आश्रम की स्थापना की थी। इसके बाद से यहां पर लगातार हर वर्ष नवकुंडात्मक महायज्ञ एवं कथाएं होती हैं। इससे पहले वर्ष 1998-99 के दौरान श्रीबजरंगगिरीजी महाराज रमगढ़ा आए थे और उन्होंने यहां पर पहली बार लक्ष्मी नारायण यज्ञ किया था। इसके बाद लोगों के आग्रह पर वह यहीं पर रुक गए एवं रूद्रधाम आश्रम की स्थापना की। श्रीरूद्रधाम आश्रम से क्षेत्र की पहचान बढ़ी। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु रूद्रधाम आश्रम में दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यह स्थान पवित्र कोलार नदी के किनारे इंदौर-भोपाल-होशंगाबाद रोड पर बना हुआ है। आश्रम से कई राज्यों के लोग जुड़े हुए थे। इनमें मध्यप्रदेश के कई जिलों सहित उत्तरप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र सहित अन्य राज्य शामिल हैं। अब श्रद्धांजलि सभा एवं भंडारे में भी बड़ी संख्या में गुरूजी के शिष्यों के साथ ही उनके भक्त भी यहां पहुंचेंगे। इसको लेकर तैयारियां भी की गईं हैं। रूद्रधाम समिति के सचिव सीताराम जाट ने बताया कि आयोजन को लेकर सभी तैयारियां कर ली गईं हैं। यहां पर गुरू पादुका पूजन के साथ ही विशेष पूजन भी होगी। इसके बाद श्रद्धांजलि सभा एवं भंडारे का आयोजन भी होगा।
13 दिनों में गुरू-शिष्य दोनों हुए थे ब्रम्हलीन-
श्रीरूद्रधाम आश्रम की स्थापना बजरंगगिरीजी महाराज ने की थी। बताया जाता है कि वे बड़े गुरूजी परमानंदजी महाराज के शिष्य थे। उन्होंने 5 वर्ष की उम्र में ही घर छोड़ दिया था। कहां से आए थे इसका जिक्र कभी नहीं किया। इससे पहले 30 अगस्त को परमानंदजी महाराज ने भी शरीर त्याग दिया था। उनका भंडारा कार्यक्रम 15 सितंबर को तय हुआ था, लेकिन अब बजरंगगिरीजी महाराज ने भी देह त्याग दी। श्रीरूद्रधाम आश्रम के कार्यक्रम संचालन समिति के सचिव सीताराम जाट ने बताया कि 15 सितंबर का भंडारा कार्यक्रम निरस्त करके अब 28 सितंबर को विशाल भंडारा कार्यक्रम तय किया गया है। समिति के मीडिया प्रभारी दिलीप सिंह ठाकुर ने बताया कि 13 दिनों में दोनों गुरूजी का ब्रम्हलीन होना हम सबके लिए दुख की बात है। उनके जाने से आश्रम में खालीपन हो गया।



