
सीहोर। सच्चा विश्वास और समर्पण मनुष्य को हर मुश्किल परिस्थिति से सहजता से बाहर निकाल लेता है, जो व्यक्ति सच्चे मन से ईश्वर का सुमिरन करता है, भगवान उसके अंत:करण में प्रकट होते हैं। प्रभु को छल-कपट प्रिय नहीं है, वे निष्कपट, सरल और सहज मन वाले भक्तों से प्रेम करते हैं।
यह विचार कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने शहर के बड़ा बाजार स्थित अग्रवाल धर्मशाला में व्यक्त किए। अवसर था अग्रवाल महिला मंडल द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के शुभारंभ का। कथा के पहले ही दिन श्रद्धालुओं की ऐसी भारी भीड़ उमड़ी कि विशाल पंडाल भी छोटा पड़ गया। जगह न मिलने पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु सडक़ए गलियों और आसपास के स्थानों पर बैठकर एलईड स्क्रीन के माध्यम से कथा का आनंद लेते नजर आए।
27 वर्षों से निरंतर जारी है भक्ति की परंपरा
उल्लेखनीय है कि भाद्रपद माह में अग्रवाल महिला मंडल द्वारा पिछले 27 वर्षों से निरंतर यह भागवत कथा आयोजित की जा रही है। इस वर्ष यह आयोजन अपने 27वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। शहर की धार्मिक परंपरा बन चुके इस आयोजन से शहर के विभिन्न महिला मंडलों और श्रद्धालुओं का गहरा भावनात्मक जुड़ाव है। वर्षों से बिना किसी विराम के जारी यह धार्मिक अनुष्ठान पूरे क्षेत्र में विशेष आस्था का केंद्र बना हुआ है।
श्री सत्यनारायण मंदिर से निकली शोभायात्रा
सात दिवसीय कथा का शुभारंभ शोभायात्रा के साथ हुआ। शोभायात्रा शहर के प्रसिद्ध श्री सत्यनारायण मंदिर से प्रारंभ होकर खजांची लाइन स्थित श्रीजी मंदिर पहुंची और वहां से कथा स्थल अग्रवाल धर्मशाला पहुंची। मार्ग में जगह-जगह क्षेत्रवासियों ने पुष्प वर्षा कर शोभायात्रा का जोरदार स्वागत किया। धार्मिक ध्वजों, जयकारों और भक्तिमय वातावरण के बीच श्रद्धालुओं ने शोभायात्रा में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
सैकड़ों किलोमीटर दूर से पहुंचे श्रद्धालु
कथा के प्रति अपार जनआस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सीहोर के स्थानीय निवासियों के अलावा दूर-दराज के क्षेत्रों से भी लोग पहुंचे। बाहर से आए श्रद्धालुओं ने बताया कि वे पंडित प्रदीप मिश्रा के दर्शन और उनके मुखारविंद से भागवत कथा का श्रवण करने के लिए सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय करके आए हैं।
भक्ति में अहंकार नहीं, श्रद्धा और विश्वास जरूरी
कथा के प्रथम दिन पंडित प्रदीप मिश्रा ने भागवत महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि शुकदेव महाराज ने राजा परीक्षित को सात दिनों तक भागवत कथा का श्रवण कराया था, जिसे परीक्षित ने पूर्ण भाव से सुनकर आत्मसात किया। उन्होंने कहा कि भागवत कथा अनादि काल से भक्तों के लिए श्रद्धा का केंद्र रही हैए जो भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम को बढ़ाती है। उन्होंने श्रद्धालुओं को संदेश दिया कि भगवान की भक्ति में अपनी बुद्धि का अहंकार नहीं होना चाहिए, बल्कि सच्चा भाव, श्रद्धा और अटूट विश्वास होना चाहिए।