
सीहोर। पंचायती राज व्यवस्था में महिलाओं को भागीदार बनाने और उन्हें आत्मनिर्भर करने के लिए दिए गए महिला आरक्षण का असली मकसद जिला पंचायत में दम तोड़ता नजर आ रहा है। वर्तमान जिला पंचायत सीईओ सृजना यादव के कार्यकाल में प्रशासनिक ढिलाई के चलते महिला सशक्तिकरण का सपना साकार होता नहीं दिख रहा है। बैठकों में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों के स्थान पर उनके पतियों का दबदबा आज भी बदस्तूर जारी है।
गुरुवार को आयोजित जिला पंचायत की सामान्य सभा की बैठक में एक बार फिर यही नजारा देखने को मिला। बैठक में नियमों को ताक पर रखकर जिला पंचायत अध्यक्ष के पति सुरेन्द्र मेवाड़ा मुख्य भूमिका में मौजूद नजर आए। यह कोई पहला मामला नहीं है, जिला पंचायत की लगभग हर आधिकारिक बैठक में महिला सदस्यों की जगह उनके पति या पुरुष रिश्तेदार ही निर्णय लेते और कार्रवाई में शामिल होते देखे जा रहे हैं।
पुरुषों को ही सौंप दें पूरी कमान
प्रशासनिक अनदेखी से आक्रोशित आम जनता का कहना है कि जब चुनकर आईं महिला प्रतिनिधि स्वतंत्रता से निर्णय ही नहीं ले पा रही हैं, तो फिर चुनाव के समय महिला आरक्षण की औपचारिकता क्यों निभाई जाती है। लोगों का कहना है कि यदि सब कुछ पतियों के इशारे पर ही चलना है तो आरक्षण का नाटक बंद कर पूरी कमान सीधे पुरुषों के हाथों में ही सौंप देनी चाहिए।
आदेशों और नियमों की उड़ रही धज्जियां
उल्लेखनीय है कि शासन और पंचायत राज नियमों के अनुसार किसी भी आधिकारिक प्रशासनिक बैठक में जनप्रतिनिधियों के पति या प्रतिनिधियों के बैठने पर सख्त प्रतिबंध है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों और सीईओ यादव की मौजूदगी में खुलेआम इन नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। नागरिकों ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए मांग की है कि बैठकों में बाहरी पुरुषों के प्रवेश पर तुरंत रोक लगाई जाए, ताकि महिला आरक्षण का वास्तविक उद्देश्य पूरा हो सके।
इन विभागों की हुई समक्षा
गुरुवार को जिला पंचायत अध्यक्ष रचना मेवाड़ा की अध्यक्षता में जिला पंचायत की सामान्य सभा की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष रचना मेवाड़ा एवं जिला पंचायत सीईओ सर्जना यादव द्वारा कृषि, पशुपालन, उद्यानिकी और शिक्षा विभाग सहित अन्य विभागों की गतिविधियों की समीक्षा की गई और आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए। बैठक में कृषि विभाग की समीक्षा के दौरान उर्वरक उपलब्धता, गुणवत्ता नियंत्रण, सूक्ष्म सिंचाई, मृदा परीक्षण, दलहन-तिलहन प्रोत्साहन तथा उपार्जन कार्यों की प्रगति पर चर्चा की गई। अधिकारियों को किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान उपलब्ध कराने, उर्वरक एवं बीज वितरण की सतत निगरानी रखने, मृदा परीक्षण बढ़ाने तथा उपार्जन एवं भुगतान संबंधी कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए गए।