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मिड.डे मील की खबर पर बवाल, स्कूल प्राचार्य ने पत्रकार के खिलाफ खोला मोर्चा

5 हजार की मांग पूरी न होने पर खबर छापने का आरोप, एसडीएम और पुलिस को सौंपा आवेदन, जांच शुरू

सीहोर। भैरुंदा के शासकीय माध्यमिक विद्यालय हाथीघाट में मध्यान्ह भोजन व्यवस्था को लेकर हाल ही में प्रकाशित एक खबर अब विवादों के घेरे में है। स्कूल प्रबंधन ने इस खबर को पूरी तरह आधारहीन और भ्रामक बताते हुए संबंधित पत्रकार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। प्राचार्या ने पत्रकार पर विज्ञापन के नाम पर अवैध वसूली और दबाव बनाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
विद्यालय की प्राचार्या राजकुमारी मीना ने एसडीएम और थाना प्रभारी को सौंपे आवेदन में बताया कि 4 फरवरी को एक समाचार पत्र में मध्यान्ह भोजन को लेकर जो खबर छपी, वह एकतरफा और तथ्यों से परे है। उन्होंने आरोप लगाया कि संवाददाता अजय राव ने बिना अनुमति स्कूल परिसर में घुसकर फोटो खींचे और शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न की।
प्राचार्या का सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि संबंधित पत्रकार ने 26 जनवरी के विज्ञापन के नाम पर 5 हजार रुपये की मांग की थी। जब स्कूल प्रबंधन ने पैसे देने से इनकार कर दिया तो बदले की भावना से स्कूल की छवि खराब करने के उद्देश्य से झूठी खबर प्रकाशित कर दी गई।
नुक्ती वितरण और समूह के बयान पर स्पष्टीकरण
खबर में बसंत पंचमी पर नुक्ती वितरण को लेकर जो दावे किए गए थे, उन्हें प्राचार्या ने सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि स्कूल में भोजन व्यवस्था राम आजीविका स्व.सहायता समूह द्वारा संभाली जाती है। समूह के किसी सदस्य के बयान को तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया ताकि शिक्षकों को बदनाम किया जा सके। प्राचार्या ने मांग की है कि बच्चों के हित में भोजन का जिम्मा किसी अन्य योग्य समूह को सौंपा जाए ताकि भविष्य में ऐसी राजनीति न हो।
बिना पुष्टि खबर छापना गलत
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए भैरूंदा एसडीएम सुधीर कुशवाह ने निष्पक्ष जांच के आदेश दिए हैं। एसडीएम ने स्पष्ट कहा किसी भी शासकीय संस्थान या शिक्षक के विरुद्ध खबर प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की पुष्टि अनिवार्य है। बिना प्रमाण छवि धूमिल करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मामले की जानकारी जनसंपर्क विभाग को भी दी जा रही है। थाना प्रभारी घनश्याम दांगी ने भी पुष्टि की है कि आवेदन के आधार पर जांच शुरू कर दी गई है और दोषियों पर नियमानुसार कार्रवाई होगी।
ग्रामीण और उपसरपंच आए समर्थन में
स्कूल प्रबंधन के समर्थन में गांव के उपसरपंच और कई गणमान्य नागरिक भी उतर आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल में शैक्षणिक अनुशासन बेहतर है और भोजन की गुणवत्ता की जिम्मेदारी स्व.सहायता समूह की होती है, न कि शिक्षकों की। शिक्षकों को बेवजह निशाना बनाना गलत है।

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