
सीहोर-नसरूल्लागंज. विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आदिवासी समाज के लोगों का सम्मान समारोह आयोजित किया गया। सीहोर जिले के नसरूल्लागंज में आयोजित समारोह में मप्र कांग्रेस कमेटी के प्रदेश सचिव अर्जुन शर्मा निक्की की अगुवाई में आदिवासी समाज संगठनों के पदाधिकारियों को शॉल, श्रीफल से सम्मानित किया गया। इस दौरान विपत सिंह उईके पूर्व सरपंच सलकनपुर, विजेन्द्र उइके जिला पंचायत सदस्य, ममता कीर जिला कांग्रेस सचिव, संतोष गौर, दुष्यंत मालवीय प्रदेश सचिव किसान कांग्रेस, अभिलाष नागर सचिव जिला कांग्रेस कमेटी, राम रघुवंशी, सुमेर सिंह उईके, बलराम, भंवर सिंह कावरे, शुभम चौहान सहित अन्य कांग्रेस नेता, पदाधिकारी, कार्यकर्ता मौजूद रहे। इधर आदिवासी समाज के लोगों ने भी विश्व आदिवासी दिवस को बड़े धूमधाम से मनाया। इस दौरान जिला मुख्यालय सीहोर सहित नसरूल्लागंज में भी कार्यक्रमोें का आयोजन हुआ। इस अवसर पर आदिवासी समाज के लोगों ने डीजे के साथ आदिवासी गीतों पर रैलियां निकालीं।
जिला मुख्यालय पर हुआ विशाल महारैली का आयोजन-
विश्व आदिवासी दिवस को जिला मुख्यालय सीहोर में हजारों की संख्या में पहुंचे आदिवासियों ने उत्सव के रूप में मनाया। आदिवासी दिवस का शुभारंभ महारैली के रूप में बाल बिहार मैदान से शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए कोतवाली चौराहा एवं नमक चौराहा होते हुए वापस बाल बिहार पहुंचा। यहां पर एक सभा भी हुई, जिसे आदिवासी समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने संबोधित किया। कार्यक्रम में जिलेभर से आए आदिवासी समाज के लोग अपनी संस्कृति, वेशभूषा, तीर कमान एवं अपने वाद्य यंत्र ढोल के साथ शामिल हुए। चल समारोह में पधारे आदिवासी समाज के लोगों का सभी सामाजिक संगठनों ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। कार्यक्रम में जयस संरक्षक जिला सीहोर रामदास सोलंकी, राष्ट्रीय बौद्ध महासभा अध्यक्ष कमलेश दोहरे, विशेष अतिथि गुना से पधारे विष्णु बारेला, जिला पंचायत सदस्य विजेन्द्र उईके, जयस के जिलाध्यक्ष रवि सोलंकी, प्रोफेसर ओमप्रकाश धुर्वे, प्रेम सिंह बारेला, भाव सिंह
सोलंकी, मुकेश जमरे, राकेश डावर, शुभम कचनारिया सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता में जयस संरक्षक जिला सीहोर रामदास सोलंकी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि आदिवासियों के मानव अधिकार को लागू करने और उनके संरक्षण के लिए 1982 में संयुक्त राष्ट्रसंघ ने आदिवासी संरक्षण के लिए उप आयोग का गठन किया था। इसलिये हम 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस मनाते हैं। आदिवासी दिवस आदिवासियों को अधिकार दिलाने और उनकी समस्याओं का निराकरण जैसे भाषा, संस्कृति, इतिहास के सरंक्षण के लिए संयुक्त राष्ट्रसंघ द्वारा 9 अगस्त 1994 को घोषित किया गया था। संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा पिछले 22 वर्षों से निरंतर विश्व मूलनिवासी दिवस मनाया जा रहा है, किन्तु भारत में मूलनिवासी बहुजनों को इसकी कोई जानकारी नहीं है।
नसरुल्लागंज में रही विश्व आदिवासी दिवस की धूम-
इधर विश्व आदिवासी दिवस की धूम नसरूल्लागंज में भी रही। यहां पर तहसील के आदिवासी समाज में खासा उत्साह दिखाई दिया। हज़ारों की तादाद में समाज ने लोग सीहोर रोड स्थित ग्रीन गार्डन में एकत्रित हुए और पूजा-अर्चना के बाद रैली निकाली। रैली नगर के विभिन्न मार्गोें से निकलीं। इस दौरान आदिवासी समाज की रैली का जगह-जगह भव्य स्वागत-सत्कार भी हुआ। रैली सीहोर नाका से दुर्गा मंदिर, बस स्टैंड, जेपी मार्केट, पुराना बाजार, मिलन मरीज गार्डन से होकर वापस ग्रीन पार्क पहुंची। इस दौरान रैली का नेतृत्व करने वाले युवा डीजे की धुन पर आदिवासियों गीतो पर जमकर थिरके। इस दौरान एसडीएम दिनेश सिंह तोमर एसडीओपी आकाश अमलकर सहित जिला एवं पुलिस प्रशासन का अन्य अमला भी तैनात रहा।