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सीहोर की सियासत में ‘ओबीसी’ का दबदबा, सत्ता हो या संगठन, भाजपा और कांग्रेस दोनों में पिछड़ा वर्ग के पास ही कमान

सीहोर। मध्यप्रदेश की राजनीति में पिछड़ा वर्ग हमेशा से ही केंद्र बिंदु रहा है, लेकिन सीहोर जिला मुख्यालय की राजनीति में इस बार एक बेहद गजब का संयोग देखने को मिल रहा है। जिले की सत्ता की चाबी हो या प्रमुख राजनैतिक दलों के संगठन के शीर्ष पद दोनों ही प्रमुख दलों भाजपा और कांग्रेस ने पिछड़ा वर्ग के चेहरों पर ही भरोसा जताया है। आलम यह है कि जिला मुख्यालय की पूरी राजनैतिक बिसात पर फिलहाल ओबीसी वर्ग के दिग्गज ही आसीन हैं।
भाजपा में पिछड़ा वर्ग का पूरा दबदबा
भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक ढांचे और सत्ता के पदों पर नजर डालें तो यहां ओबीसी वर्ग का वर्चस्व स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। भाजपा के जिलाध्यक्ष नरेश मेवाड़ा स्वयं पिछड़ा वर्ग से आते हैं। वहीं सीहोर विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे विधायक सुदेश राय भी इसी वर्ग का चेहरा हैं। इतना ही नहीं जिले की सर्वोच्च पंचायत यानी जिला पंचायत की अध्यक्ष रचना सुरेंद्र मेवाड़ा भी ओबीसी वर्ग से ताल्लुक रखती हैं। संगठन के निचले स्तर पर बात करें तो सीहोर नगर के दोनों मंडलों की कमान भी इसी वर्ग के पास है। मंडल अध्यक्ष-1 सुदीप प्रजापति और मंडल अध्यक्ष-2 सुशील ताम्रकार दोनों ही पिछड़ा वर्ग से आते हैं।
कांग्रेस में भी पिछड़ा वर्ग का चेहरा ही आगे
भाजपा की ही राह पर चलते हुए विपक्षी दल कांग्रेस ने भी सीहोर में अपनी रणनीति ओबीसी कार्ड पर ही केंद्रित रखी है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजीव गुजराती जो लंबे समय से जिले में पार्टी की कमान संभाल रहे हैं, पिछड़ा वर्ग के एक प्रभावी नेता माने जाते हैं। उनके साथ ही सीहोर शहर ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष घनश्याम यादव भी इसी वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं। यानी जिले के मुख्य राजनैतिक मुकाबलों में आमने-सामने की लड़ाई में दोनों ओर से पिछड़ा वर्ग के ही सेनापति मैदान में हैं।

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