151 नदियों के जल से होगा श्री लक्ष्मी नारायण का जलाभिषेक, नीलकंठ धाम पर संतों ने किया दिव्य अनुष्ठान

सीहोर। नगर में आगामी 25 अप्रैल से प्रारंभ होने जा रहे भव्य पंच कुण्डात्मक श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ को लेकर शहर पूरी तरह भक्तिमय हो गई है। इसी कड़ी में रविवार को नीलकंठ धाम पर संतों और समिति के सदस्यों द्वारा पूर्ण विधि-विधान के साथ दिव्य अनुष्ठान संपन्न किया गया। इस महायज्ञ की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें देशभर की 151 पवित्र नदियों के जल से भगवान का जलाभिषेक किया जाएगा।
संत माधव दास महाराज एवं यज्ञाचार्य पंडित कुणाल व्यास के मार्गदर्शन में श्रद्धालुओं ने नर्मदा कलश और ध्वज का पूजन किया। इस अवसर पर सवारी प्रभारी सन्नी राजपाल सरदार ने पवित्र नदियों के जल से भरे कलशों को रवाना किया। आयोजन समिति ने बताया कि इस जल संग्रह में गंगा, यमुना, नर्मदा, अलकनंदा और मंदाकिनी सहित देश की 151 प्रमुख नदियों का पावन जल शामिल है।
महाकाल और पुरी की तर्ज पर निकलेगी सवारी
मुख्य यजमान नमिता अखिलेश राय के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में 25 अप्रैल को उज्जैन के महाकाल और जगन्नाथ पुरी की तर्ज पर एक भव्य सवारी निकाली जाएगी। इस ऐतिहासिक सवारी में देशभर के नागा साधु, निहंग सिंह और महान संत-महात्मा शामिल होकर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देंगे। साथ ही 5 हजार से अधिक महिलाएं इन पवित्र नदियों के जल से भरे कलश लेकर यात्रा में शामिल होंगी, जो आयोजन को भव्य स्वरूप प्रदान करेंगी।
धार्मिक अनुष्ठान के साथ जल संरक्षण का संदेश
अनुष्ठान के दौरान संत माधव दास महाराज ने जल की पवित्रता पर जोर देते हुए कहा कि मां नर्मदा हमारी आस्था का केंद्र है और इसे स्वच्छ व अविरल रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। वहीं जिला संस्कार मंच के मनोज दीक्षित ने कहा कि इस कलश यात्रा का उद्देश्य न केवल धार्मिक है, बल्कि जल संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना भी है। उन्होंने अपील की कि नदियों में ऐसी पूजन सामग्री न डालें जिससे प्रदूषण फैले और तटों पर अधिक से अधिक वृक्षारोपण करें।
ये रहेंगे मार्गदर्शक
यह भव्य आयोजन श्रीश्री 1008 महामंडलेश्वर महंत रामभूषण दास महाराज एवं महंत राघव दास महाराज के निर्देशन में संपन्न होगा। आयोजन समिति ने समाज के सभी वर्गों से इस पुनीत कार्य और महायज्ञ में सहभागी बनने का आह्वान किया है।



